मॉल की व्यवस्था पर सवाल
मॉल की तीसरी मंजिल से लेकर बेसमेंट में बनी पार्किंग तक आने के लिए लोग लिफ्ट का इस्तेमाल करते हैं। रविवार रात हुए हादसे ने मॉल की व्यवस्था को भी कठघरे में खड़ा किया है। मसलन, लिफ्ट के अंदर यदि ऑपरेटर होता तो वह अंदर फंसे लोगों को लिफ्ट से जुड़े सुरक्षा नियमों की जानकारी दे सकता था और उन्हें गेट पर बल प्रयोग से रोक सकता था।
मॉल प्रबंधन ने दी ये दलील
लिफ्ट में लगा अलार्म बटन भी काम नहीं कर रहा था। कॉल बटन से भी कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला। मॉल प्रबंधन का भी कहना है कि लोगों के लात मारने और जोर-जोर से पीटने के कारण लिफ्ट के सेंसर ने काम करना बंद कर दिया। इस कारण जनरेटर चालू होने के बाद भी गेट नहीं खुला और लोग अंदर ही फंसे रहे।
बाहर मौजूद लोगों ने बंधाई हिम्मत
सनराइज कॉलोनी निवासी आयुष गंगवार ने बताया कि अंदर 13 लोग थे। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा परेशान हुए। कुछ देर तक तो उन लोगों को भी समझ में नहीं आया कि क्या किया जाए। करीब 15 मिनट तक कोई मदद भी नहीं पहुंची। इसके बाद बाहर से लोग गेट पीटकर हिम्मत बंधाने लगे। बाहर लोगों के होने का पता चला तो जान में जान आई।
बाहर मौजूद लोग बने देवदूत
लिफ्ट जब फर्स्ट फ्लोर पर अटकी तो अंदर से मदद के लिए लोग चिल्लाने लगे। इसी दौरान बाहर मौजूद लोगों ने गेट खोलने का प्रयास शुरू कर दिया। बाहर मौजूद राजेंद्र निगम, जितेंद्र सक्सेना, अमन सिंह आदि ने बताया कि उन लोगों ने शोर मचाकर सिक्योरिटी गार्ड को भी मौके पर बुलाने का प्रयास किया, लेकिन कोई आसपास मौजूद नहीं था। इसके बाद कुछ और लोग जुट गए, जिनकी मदद से लोहे की रॉड के सहारे गेट को तोड़ा गया।



