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Intercropping Benefits : फिरोजाबाद के किसान सचिन अपने खेतों में गन्ना के साथ मूंग और उड़द उगाते हैं. इसे उगाने के लिए वे किसी भी रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं करते हैं. सचिन अपनी खेती को पूरी तरह से प्राकृतिक रखे हुए हैं. गन्ने के साथ सहफसली करने से खेतों में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है. पैदावार बढ़ती है. खेतों में सहफसल के अवशेष मिट्टी में मिल जाते हैं, जिससे उसकी उर्वरक क्षमता बढ़ती है. सचिन आलू और गन्ने की खेती के साथ क्यारियों में चना, मटर, सौंफ भी उगाते हैं. सहफसली की खेती से कम लागत में एक साथ दो फसलों को उगाने में मदद मिलती है.
फिरोजाबाद. यूपी के फिरोजाबाद में एक किसान कई सालों से जैविक खेती कर रहा है. वह इसके साथ सहफसली खेती भी करता है, जिससे उसे डबल मुनाफा हो रहा है. वह आलू और गन्ने की खेती के साथ क्यारियों में चना, मटर, सौंफ भी उगाता है. सहफसली की खेती से कम लागत में एक साथ दो फसलों को उगाने में मदद मिलती है. रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं करता. वह अब दूसरे किसानों को भी जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रहा है. फिरोजाबाद के सांति गांव में रहने वाले किसान सचिन कुमार ने लोकल 18 से कहा कि वह पिछले कई सालों से जैविक खेती कर रहे हैं. अपने खेतों में गन्ना और आलू को उगाते हैं. इसके साथ सहफसली भी करते हैं. सहफसली खेती किसानों की आय दोगुना कर सकती है. सचिन अपने खेतों में गन्ना के साथ मूंग और उड़द उगाते हैं. इसे उगाने के लिए वे किसी भी रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं करते हैं. सचिन अपनी खेती को पूरी तरह से प्राकृतिक रखे हुए हैं.
सचिन बताते हैं कि गन्ने के साथ सहफसली करने से खेतों में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है. पैदावार बढ़ती है. सचिन आलू की खेती भी सहफसली विधि से करते हैं, जिसमें चना, मटर, सौंफ को क्यारी बनाकर उगाते हैं. इस विधि से खेती करने पर अधिक पैदावार होती है. खेतों में सहफसल के अवशेष मिट्टी में मिल जाते हैं, जिससे उसकी उर्वरक क्षमता बढ़ती है.
घर से ही मिलता दोगुना दाम
सचिन के मुताबिक, सहफसली से उनकी इनकम दोगुना हो गई है. खेतों में उगने वाली फसल को चाहे वह गन्ना हो या आलू और इसके साथ उगाई जाने वाली सहफसल को अपने रेट में घर से ही बेचते हैं. उनके यहां प्राकृतिक तरीके से फसल की पैदावार होती है, इसलिए फसल के रेट मंडी से अच्छे मिलते हैं. वह घर से ही सभी फसल को दोगुने दामों में बेचते हैं. सचिन कहते हैं कि इस विधि से उनको हर फसल पर 80 हजार रुपये प्रति बीघा तक की पैदावार हो जाती है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें