राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में 22 जून को एनिमेशन कोचिंग सेंटर में हुई अग्निकांड की घटना पर तबाड़तोड़ एक्शन जारी है। एक ओर लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने इस अवैध बिल्डिंग को गिराने की तैयारी शुरू कर दी है तो दूसरी ओर इसके मालिक वीरेंद्र शुक्ला को जेल भेज दिया गया है।पुलिस ने आरोपी को बीती रात डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (CJM) के सामने पेश किया, जिसके बाद उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अलीगंज सेक्टर-डी स्थित चार मंजिला व्यावसायिक इमारत में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत मामले की जांच जारी है। पुलिस ने अब तक घटना के मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिसमें बिल्डिंग का मालिक वीरेंद्र शुक्ला भी शामिल है। मामले में सोमवार को मुकदमा दर्ज होने के बाद गिरफ्तार किए गए आरोपितों से पूछताछ पूरी कर मंगलवार को उन्हें अदालत में पेश किया गया।
अवैध बिल्डिंग के मालिक वीरेंद्र शुक्ला गए जेल
पुलिस ने आरोपी को मंगलवार देर रात डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (CJM) के सामने पेश किया। पेशी के बाद अवैध इमारत के मालिक वीरेंद्र शुक्ला को जेल भेज दिया गया है। गिरफ्तारी से बचने के लिए सीने में दर्द और दिल की बीमारी का बहाना बनाने वाले वीरेंद्र शुक्ला को डॉक्टरों की जांच के बाद फिट पाया गया। जिसके बाद कोर्ट ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
चारों आरोपियों को 14 दिन के न्यायिक हिरासत
मिली जानकारी के अनुसार, वीरेंद्र शुक्ला के साथ-साथ एनिमेशन एवं गेमिंग जोन संचालक तुषांक कृष्ण जायसवाल, पेट शॉप एवं क्लीनिक संचालक रामकृष्ण उपाध्याय और इमारत में नेटवर्किंग कार्य करने वाले सुरेश कुमार को भी जेल भेज दिया गया है।
बिल्डिंग को आवासीय उपयोग के लिए मिली थी मंजूरी
जांचकर्ताओं ने पाया कि जिस भवन में यह हादसा हुआ, उसे रेसिडेंशियल (आवासीय) उपयोग के लिए मंजूरी मिली थी। बाद में उसमें कोचिंग सेंटर, एनीमेशन स्टूडियो, लाइब्रेरी और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी गईं। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि भवन को आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृति दी गई थी।
LDA ने जारी किया नोटिस
लखनऊ विकास प्राधिकरण की प्रवर्तन जोन-4 की टीम ने बिल्डिंग के मालिक वीरेन्द्र शुक्ला के साथ-साथ सुरेन्द्र शुक्ला और बाकी आरोपियों को नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस में कहा गया है कि भवन का मानचित्र आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत था, लेकिन वहां व्यावसायिक उपयोग (कोचिंग) के लिए इसका इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके अलावा स्वीकृत मानचित्र के विपरीत कई निर्माण संबंधी विचलन भी पाए गए हैं।
बुलडोजर एक्शन की तैयारी
बिल्डिंग में फायर सेफ्टी के न्यूनतम मानकों का भी पालन नहीं किया गया था। आपात स्थिति में निकासी के लिए कोई वैकल्पिक द्वार नहीं था। पूरी इमारत में आने-जाने का केवल एक ही रास्ता था। साथ ही धुएं को बाहर निकालने की कोई व्यवस्था भी नहीं की गई थी। नियमों के पालन नहीं होने की वजह से बिल्डिंग को गिराने का नोटिस जारी किया गया है।