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UP News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के 73 गांवों में रहने वालों के लिए शानदार खबर है. यहां की 210 हेक्टेयर भूमि सोना उगलने वाली है. दरअसल, विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना के तहत 3 तहसीलों के गांवों की जमीन की जरूरत होगी.
विंध्य एक्सप्रेसवे.
प्रयागराज : उत्तर प्रदेश के लिए एक अच्छी खबर है. प्रयागराज में प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना ने रफ्तार पकड़ ली है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत 73 गांव की जमीन सोना उगलेगी. अब ये आपकी जमीन है या नहीं ये जानने के लिए पढ़ लीजिए पूरी खबर. दरअसल, विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना के तहत करीब 210 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा. उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर प्राथमिक सर्वे रिपोर्ट जिला प्रशासन को मिल गई है. अब विस्तृत सर्वे के माध्यम से यह तय किया जाएगा कि किन किसानों की भूमि अधिग्रहण की जद में आएगी और कितने काश्तकार इससे प्रभावित होंगे.
73 गांवों में होगी भूमि की जरूरत
विंध्य एक्सप्रेसवे प्रयागराज जिले की सोरांव, फूलपुर और हंडिया तहसीलों से होकर गुजरेगा. यूपीडा की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार इन तीनों तहसीलों के कुल 73 गांवों में भूमि की आवश्यकता होगी. रिपोर्ट के मुताबिक हंडिया तहसील में 78 हेक्टेयर, फूलपुर में 68 हेक्टेयर और सोरांव में 64 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जाएगी. जिला प्रशासन ने संबंधित एसडीएम से सर्वे कराकर आवश्यक भूमि का ब्योरा भी मांगा है.
कितने लोग होंगे प्रभावित?
प्रशासन का अनुमान है कि भूमि अधिग्रहण से करीब 400 से 500 काश्तकार प्रभावित हो सकते हैं. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह संख्या अभी प्रारंभिक आकलन पर आधारित है. लेखपालों की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद प्रभावित किसानों की वास्तविक संख्या और अधिग्रहित होने वाली भूमि का अंतिम आंकड़ा स्पष्ट होगा. इसके बाद मुआवजा और भूमि अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
चित्रकूट में सर्वे होने की संभावना
इसी के साथ चित्रकूट-प्रयागराज-वाराणसी ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरिडोर परियोजना भी आगे बढ़ रही है. लगभग 294 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण का सर्वे सावन माह में शुरू किया जाएगा. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने इस कार्य के लिए भोपाल की कंसल्टेंट कंपनी नित्या नायारा का चयन किया है. अगस्त के पहले सप्ताह से चित्रकूट क्षेत्र में सर्वे शुरू होने की संभावना है.
दो चरण में तैयार होगी परियोजना
परियोजना को दो चरणों में विकसित किया जाएगा. चित्रकूट से प्रयागराज तक के हिस्से का सर्वे और भूमि अधिग्रहण एनएचएआई कराएगा, जबकि प्रयागराज से वाराणसी तक का कार्य सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के जिम्मे रहेगा. एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार भूमि अधिग्रहण और एलाइनमेंट का कार्य लगभग चार महीने तक चलेगा. सर्वे पूरा होने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर मुख्यालय को मंजूरी के लिए भेजी जाएगी. परियोजना पूरी होने पर चित्रकूट, प्रयागराज और वाराणसी के बीच सड़क संपर्क मजबूत होगा, यात्रा का समय कम होगा और क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है.
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Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें