राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच में एक अहम खुलासा हुआ है। ट्रस्ट से इस्तीफा देने वाले सदस्य अनिल मिश्रा ने सबसे अधिक करीब सवा सौ अपने लोगों की भर्ती मंदिर प्रबंधन में कराई थी। चंपत और गोपाल राव के लोगों की भर्ती उनके मुकाबले लगभग आधी थी। एसआईटी जांच में ये अहम तथ्य सामने आया है। अनिल मिश्रा की भूमिका कमीशन से लेकर चढ़ावा चोरी में गहराती जा रही है।
दरअसल, चोरी में अब जो गिरफ्तार हुए हैं, उनमें टिन्नू यादव, चंपत राय का करीबी था जबकि आरोपी सुभाष श्रीवास्तव रिटायर बैंक कर्मी है। इसके अलावा अन्य छह आरोपी बैंक की तरफ से एक कंपनी के जरिये ठेके पर रखे गए थे। हालांकि ये सभी ट्रस्ट के पदाधिकारियों के सिफारिशी थे।
अनुकल्प और लवकुश मिश्रा, जिनकी भूमिका इस खेल में काफी बड़ी है, अनिल मिश्रा के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर प्रबंधन ने जितने भी कर्मी अपने स्तर पर रखे थे उनमें से अधिकतर अनिल के परिचित, करीबी या रिश्तेदार थे। जिसको चाहते उसको नौकरी दे देते। इसलिए उनका हस्तक्षेप भी हर जगह पर रहता था।
गड़बड़ियों की आशंका पर जब एक बैंक अधिकारी ने सभी गणनाकर्मियों को हटाने की बात कही थी तब ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों ने इसका विरोध किया था। यही नहीं, किसी को भी हटाने नहीं दिया था। सूत्रों के मुताबिक इसमें चंपत राय, गोपाल राव व टिन्नू यादव ने तो पैरवी की ही थी, मगर सबसे अधिक सिफारिश अनिल मिश्रा ने की थी। वह अड़ गए थे कि कोई भी कर्मी नहीं हटाया जाएगा। हुआ भी यही था। अब पता चल रहा है कि इसके पीछे का असल खेल क्या था।
अनिल पर कमीशन लेने के भी आरोप
एसआईटी अनिल मिश्रा पर कमीशन लेने के आरोपों की भी जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान उनकी कई संपत्तियों के बारे में पता चला है।
- एसआईटी ये भी आकलन कर रही है कि ट्रस्टी बनने के बाद उनकी संपत्ति कितनी बढ़ी है। सूत्र बताते हैं कि इसमें कई गुना बढ़ोतरी हुई है, जो सामान्य नहीं है। जब एसआईटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपेगी तो उसमें इसकी कई परतें खुलेंगी।