इसके बाद करीब 10 दिनों तक यह मामला सार्वजनिक नहीं हुआ। सात जून को समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय ने इस मुद्दे को उठाया। अगले दिन आठ जून को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मामला उठाया।
इसके बाद यह प्रकरण राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का विषय बन गया तथा राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे। हालांकि अब इस मामले में प्रदेश सरकार की ओर से गठित एसआईटी की टीम जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में दोषी पाए गए आठ लोगों को जेल भी भेज दिया गया है।
अब यह सवाल उठा रहा है कि जब मामला 27 मई को ही सामने आ गया था तो इस मामले को दबाने का प्रयास क्यों किया गया और वह फोन किसका था जिसके दबाव में आकर चंपत राय ने एफआईआर नहीं कराई थी।
आरोपियों ने करोड़ों की चोरी कबूली अनिल मिश्रा, टिन्नू के नाम लिए
पुलिस ने कोर्ट की अनुमति के बाद मंगलवार को जेल में बंद राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपियों से करीब दो घंटे पूछताछ की। सबसे लंबी पूछताछ आरोपी अवनीश शुक्ला से की गई। आरोपियों ने करोड़ों की चोरी स्वीकारते हुए पूरे घटनाक्रम के बारे में भी बताया। इस दौरान ट्रस्टी अनिल मिश्रा का नाम फिर सामने आया।



