लखनऊ यूनिवर्सिटी के कला महाविद्यालय के जाने-माने आर्टिस्ट और प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमार की सेवानिवृत्ति पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जन संस्कृति मंच (जसम) ने विकास नगर स्थित ‘कलाघर’ में ‘एक शाम धर्मेंद्र कुमार के साथ’ शीर्षक से यह कार्यक्रम आयोजित किया। यह आयोजन शहर के संस्कृति कर्मियों, कलाकारों, लेखकों और पुराने दोस्तों के आत्मीय मिलन समारोह में बदल गया। जसम की ओर से प्रोफेसर धर्मेंद्र को शाल, पुष्प गुच्छ और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन जसम लखनऊ की सचिव फरजाना महदी ने किया। मूर्तिकला के क्षेत्र में उनका काम बेमिसाल रहा कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमार की कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के आत्मप्रचार के दौर में प्रोफेसर धर्मेंद्र जैसे लोग विरले हैं, जो खामोशी से काम करते हैं। मूर्तिकला के क्षेत्र में उनका काम बेमिसाल रहा है, लेकिन वे अपने काम का प्रचार करने से हमेशा बचते रहे। उनके पूर्व सहकर्मी लालजीत अहीर ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन धर्मेंद्र कुमार जैसी प्रतिभा को समझ नहीं पाया। अहीर ने यह भी कहा कि ऐसी उपेक्षाओं के कारण ही गौरवशाली अतीत वाला लखनऊ आर्ट कॉलेज अपनी पुरानी चमक खो रहा है। कला शिक्षक पत्नी नीता कुमार के साथ मिलकर ‘कला गांव’ की शुरुआत वक्ताओं ने प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमार की सामाजिक प्रतिबद्धता को भी याद किया। उन्होंने बताया कि जब देश में सांप्रदायिक उन्माद और फासीवाद का उभार हो रहा था, तब प्रोफेसर धर्मेंद्र ने महाविद्यालय में ‘फासिस्ट गैलरी’ की स्थापना कर अपनी वैचारिक उपस्थिति दर्ज कराई थी। उन्होंने अपनी कला शिक्षक पत्नी नीता कुमार के साथ मिलकर ‘कला गांव’ की भी शुरुआत की थी। जौनपुर से आकर लखनऊ आर्ट कॉलेज में प्रोफेसर बने धर्मेंद्र कुमार को मार्क्सवाद की वैचारिक प्रतिबद्धता अपने कम्युनिस्ट पिता से विरासत में मिली थी। इसी वैचारिक दृढ़ता के कारण वे सिद्धांतों के लिए हमेशा प्रशासकों से टकराते रहे। ये मौजूद रहे इस अवसर पर कला समीक्षक शहंशाह हुसैन, कौशल किशोर, आलोक कुमार, शैलेश पंडित, सत्य प्रकाश और परिवार के सदस्यों सहित कई छात्रों ने प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमार के साथ अपने अनुभव साझा किए।
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प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमार को 'कलाघर' में सम्मान:लखनऊ यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर की रिटायर्ड होने पर 'एक शाम' कार्यक्रम