लखनऊ: योगी सरकार अब प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था का अभूतपूर्व कायाकल्प करने जा रही है, जिसके बाद गंभीर से गंभीर बीमारी और भीषण सड़क हादसों में भी मरीजों की जान बचाना बेहद आसान हो जाएगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे के हर जिले तक कैंसर के इलाज की वर्ल्ड क्लास सुविधाएं पहुंचाने और सड़क दुर्घटनाओं या अन्य आपातकालीन स्थितियों में ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर त्वरित इलाज सुनिश्चित करने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी, प्रदेशव्यापी एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी नेटवर्क (UPTEN) स्थापित करने का बड़ा फरमान जारी कर दिया है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों और देश के नामचीन चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ एक हाई-लेवल मैराथन बैठक की. इस बैठक में ‘उत्तर प्रदेश राज्य कैंसर टास्क फोर्स’ और ‘उत्तर प्रदेश ट्रॉमा एवं इमरजेंसी नेटवर्क’ द्वारा तैयार की गई विस्तृत योजनाओं की गहन समीक्षा की गई. बैठक के बाद सीएम योगी ने साफ तौर पर निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को अब सिर्फ ‘बीमारी के बाद इलाज’ तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे रोकथाम (Prevention), समय पर स्क्रीनिंग, आधुनिक तकनीक, और पुनर्वास से लैस एक संपूर्ण और सुदृढ़ प्रणाली बनाया जाएगा. सरकार ने इसके लिए वर्ष 2026 से 2036 तक का एक व्यापक ’10 वर्षीय राज्य कैंसर रोडमैप’ तैयार किया है, जिसके तहत हर मंडल में अत्याधुनिक कैंसर सेंटर खोले जाएंगे.
क्या है योगी सरकार के कैंसर मिशन के 8 स्तंभ?
बैठक में विशेषज्ञों ने बताया कि जागरूकता की कमी और देर से बीमारी का पता चलने के कारण कैंसर आज एक खौफनाक जनस्वास्थ्य चुनौती बन चुका है. इसी को मात देने के लिए योगी सरकार का नया ‘कैंसर मिशन’ कुल 8 प्रमुख स्तंभों (Pillars) पर खड़ा होगा. इसमें कैंसर की रोकथाम और स्क्रीनिंग, सटीक निदान और त्वरित रेफरल, आधुनिक बुनियादी ढांचा, पैलिएटिव केयर और पुनर्वास, डिजिटल हेल्थ रजिस्ट्री, क्षमता निर्माण और ऑन्कोलॉजी अनुसंधान शामिल हैं.
इतना ही नहीं, मासूम बच्चों में होने वाले बाल्यावस्था कैंसर के इलाज के लिए भी राज्य के सभी प्रमुख केंद्रों पर विशेष और समग्र उपचार की व्यवस्था की जाएगी. तंबाकू जनित कैंसर को रोकने के लिए सरकार अब आयुष विभाग के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर एक बड़ा जागरूकता अभियान भी छेड़ने जा रही है, जिसमें लोगों की जीवनशैली और शुद्ध पेयजल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
‘गोल्डन ऑवर’ में बचेगा जीवन, 60 मिनट में मिलेगा इलाज
सड़क हादसों में होने वाली मौतों के आंकड़ों को न्यूनतम करने के लिए मुख्यमंत्री ने सबसे बड़ा दांव ‘गोल्डन ऑवर’ पर खेला है. हादसे के बाद का पहला एक घंटा मरीज की जिंदगी के लिए सबसे कीमती होता है. सीएम ने स्पष्ट कहा कि “इमरजेंसी सेवाएं किसी भी अस्पताल की रीढ़ होती हैं.” एम्बुलेंस के रिस्पांस टाइम को और बेहतर करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं.
इसके लिए ‘उत्तर प्रदेश ट्रॉमा एवं इमरजेंसी नेटवर्क’ (UPTEN) के तहत राज्यभर में तीन स्तरों (लेवल-1 एपेक्स केंद्र, लेवल-2 क्षेत्रीय केंद्र और लेवल-3 जिला व प्राथमिक प्रतिक्रिया इकाइयाँ) पर इमरजेंसी यूनिट्स बनाई जा रही हैं. इस मजबूत चक्रव्यूह जैसी व्यवस्था का लक्ष्य यह है कि प्रदेश की लगभग 95 प्रतिशत आबादी को किसी भी हादसे या इमरजेंसी की स्थिति में मात्र 60 मिनट यानी 1 घंटे के भीतर विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं मिल सकें.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संभालेगा कमान
इस पूरे नेटवर्क को पूरी तरह हाई-टेक और डिजिटल बनाया जा रहा है. अस्पतालों के बीच मरीजों को रेफरल के नाम पर दौड़ाने के झंझट को खत्म करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डिजिटल रेफरल प्रणाली विकसित की जाएगी. इसके जरिए एम्बुलेंस, डॉक्टरों की मौजूदगी, बेड की उपलब्धता और वेंटिलेटर की वास्तविक समय (Real-Time) में मॉनिटरिंग होगी.
राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) पर विशेष त्वरित चिकित्सा सहायता दस्ते तैनात किए जाएंगे. विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए मेडिकल शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान और विशेष प्रशिक्षण को भी अनिवार्य किया जा रहा है. योगी आदित्यनाथ के इस ऐतिहासिक और दूरदर्शी फैसले से उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नए स्वर्णिम युग की शुरुआत होने जा रही है.