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सिर्फ हाईवे नहीं, यूपी की तरक्की का इंजन है गंगा एक्सप्रेस-वे, कई धार्मिक स्थल होंगे कनेक्ट, तीर्थयात्रियों के लिए अब ‘सफर’ होगा सुहाना
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सीएम जोखिम पशुधन बीमा योजना | CM Risk Livestock Insurance Scheme


Last Updated:

CM Risk Livestock Insurance Scheme | यूपी सीएम जोखिम पशुधन बीमा योजना का लाभ लेने के लिए पशु स्वस्थ होना चाहिए और उसके कान में ईयर टैग लगा होना अनिवार्य है. पशुपालक के पास आधार कार्ड, बैंक खाता, मोबाइल नंबर तथा पशु का स्वास्थ्य प्रमाणपत्र होना चाहिए. बीमा कराने के समय पशु का फोटो और पहचान संबंधी दस्तावेज भी जमा करने होते हैं. अगर बीमित पशु की मृत्यु हो जाती है तो पशुपालक को 24 से 48 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को सूचना देनी होती है. क्लेम के लिए मृत्यु सूचना, पशु का ईयर टैग, पशु चिकित्सक द्वारा जारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट (जहां आवश्यक हो), मृत्यु प्रमाणपत्र, दावा प्रपत्र, पशु की फोटो और बैंक खाते का विवरण देना होता है.

Zoom

मुख्यमंत्री जोखिम पशुधन बीमा योजना को लेकर योगी कैबिनेट का अहम फैसला.

सीएम जोखिम पशुधन बीमा योजना | CM Risk Livestock Insurance Scheme |  यूपी कैबिनेट की सोमवार को हुई अहम बैठक में 27 प्रस्‍तावों पर मुहर लगा दी गई. इनमें एक प्रस्‍ताव प्रदेश के पशुपालकों, डेयरी फार्मिंग करने वाले किसानों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है. यह उनके लिए फायदे की बात भी है. प्रस्‍ताव पर मुहर लगते ही अब सीएम जोखिम पशुधन बीमा प्रबंधन योजना पूरे यूपी में लागू हो जाएगी. कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह के अनुसार, इसके साथ ही पशु नस्ल सुधार, बीमा, स्वदेशीय गोवंश संवर्धन को लेकर कई प्रस्तावों पर मुहर लगी है.

कब, किस पशु पर कितना बीमा मिलेगा?
सीएम जोखिम पशुधन बीमा प्रबंधन योजना के तहत सरकार इसमें प्रीमियम 85 फासदी (51 फीसदी केंद्र और 34 फीसदी राज्य) देगी, जबकि 15 फीसदी लाभार्थी को ही देना होगा. ऐसे जानवरों की दुर्घटना, बीमारी से मृत्यु होने पर महीने के अंदर पशुपालक को बीमा रकम दिलाई जाएगी. प्रस्‍ताव पास होने के साथ ही योजना के तहत मुर्रा भैंस की मृत्‍यु पर 75 हज़ार, देसी गाय पर 40 हज़ार, बकरी-भेड़ पर 6.5 हज़ार तो घोड़े पर 60 हज़ार मिलेंगे. हालांकि यह साफ किया गया है कि छुट्टा पशुओं पर यह नीति लागू नहीं होगी.

दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए मुख्यमंत्री जोखिम पशुधन बीमा प्रबंधन योजना चला रही है. इस योजना के तहत गाय, भैंस, बकरी, भेड़, सूअर, घोड़ा, ऊंट, गधा, खच्चर और अन्य पालतू पशुओं का बीमा कराया जा सकता है. किसी दुर्घटना, बीमारी या अन्य बीमायोग्य कारण से पशु की मृत्यु होने पर बीमा कंपनी निर्धारित नियमों के अनुसार मुआवजा देती है, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान से राहत मिलती है.

योजना के तहत पशु के बाजार मूल्य के आधार पर बीमा किया जाता है. एक वर्ष और तीन वर्ष की अवधि के लिए बीमा कराने का ऑप्‍शन उपलब्ध है. पहले साल में सामान्य वर्ग के पशुपालकों को प्रीमियम का 50 प्रतिशत और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों को 70 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है. दूसरे और तीसरे वर्ष में भी सरकार अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार प्रीमियम पर सब्सिडी देती है. योजना के तहत प्रति परिवार अधिकतम 5 बड़े पशु या 50 छोटे पशु (5 कैटल यूनिट) तक बीमा कराया जा सकता है.

किन मामलों में मिलेगा मुआवजा, किनमें नहीं?
योजना के तहत बीमारी, दुर्घटना, बिजली गिरने, आग, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं या अन्य बीमायोग्य कारणों से पशु की मृत्यु होने पर बीमा राशि दी जाती है. चोरी के बाद पशु की मृत्यु सिद्ध होने की स्थिति में भी नियमानुसार क्लेम मिल सकता है. जानबूझकर पशु को नुकसान पहुंचाने, बीमा अवधि शुरू होने से पहले हुई बीमारी, गलत जानकारी देकर बीमा कराने, पहले से हुई गंभीर बीमारी या बीमा की शर्तों का उल्लंघन करने पर मुआवजा नहीं दिया जाता. इस योजना में पशु का बीमा उसके असल बाजार मूल्य के अनुसार किया जाता है. दावा राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है. सरकार का मकसद पशुपालकों की आय को सुरक्षित करना, पशुपालन को बढ़ावा देना और पशु की आकस्मिक मृत्यु से होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई करना है.

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Sandeep KumarSenior Assistant Editor

I currently serve as a Senior Assistant Editor at News18 Hindi, leading State & Local18 operations across Uttar Pradesh, Uttarakhand, Delhi, Himachal Pradesh and Haryana. With over 17 years of experience in jou…और पढ़ें





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