गाजियाबाद में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो चलती कार में अवैध तरीके से सेक्स डिटरमिनेशन टेस्ट करता था. पुलिस ने इस मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के कब्जे से एक मारुति अर्टिगा कार, मिनी अल्ट्रासाउंड मशीन, जेली, पावर सप्लाई का सामान और नकदी बरामद की गई है. पुलिस का कहना है कि गिरोह काफी समय से इस अवैध धंधे में लगा हुआ था.
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संदीप, तस्लीम, सलमान और साहिल अहमद के रूप में हुई है. चारों 12वीं तक पढ़े हैं. इनमें से सलमान रैपिडो चलाने का भी काम करता है.
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनके पास दिल्ली, एनसीआर और हरियाणा से महिलाएं आती थीं. वे करीब ₹10 हजार लेकर गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग बताते थे. अगर गर्भ में बेटी होने की जानकारी मिलती थी और कोई गर्भपात कराना चाहता था, तो उसे आगे दूसरे लोगों के पास भेजने का भी इंतजाम किया जाता था.
रेड के दौरान कार से मिला पूरा सामान
पुलिस के मुताबिक, मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक चलती कार में भ्रूण लिंग परीक्षण किया जा रहा है. इसके बाद पुलिस, राजस्व विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संयुक्त कार्रवाई की.
छापेमारी के दौरान यूपी-14 एफएल-9335 नंबर की मारुति अर्टिगा कार से चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. कार से मिनी अल्ट्रासाउंड मशीन, जेली, पावर सप्लाई का उपकरण और अन्य मेडिकल सामान बरामद हुआ. पुलिस को मौके से एक महिला मरीज से लिए गए ₹20 हजार भी मिले.
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि एक मरीज पर काम करने के बदले उन्हें ₹2,000 से ₹3,000 तक की कमाई होती थी. शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था और इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं.
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पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है. अब उन लोगों की तलाश की जा रही है जो महिलाओं को इस गिरोह तक लेकर आते थे. इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि लिंग परीक्षण के बाद गर्भपात कराने में किन अस्पतालों, क्लीनिकों या डॉक्टरों की भूमिका थी.
पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़कर सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. स्वास्थ्य विभाग भी मामले की अलग से जांच कर रहा है.