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Mahua Benefits for Cattle: ग्रामीण इलाकों में महुआ का पेड़ केवल इंसानों की आजीविका ही नहीं, बल्कि पशुओं की सेहत सुधारने का भी एक बड़ा जरिया है. गोंडा के पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा के अनुसार, महुआ के फूलों में मौजूद प्राकृतिक शर्करा और कार्बोहाइड्रेट मवेशियों को भरपूर ऊर्जा देते हैं. पशुओं के चारे में इसे संतुलित मात्रा में मिलाने से न केवल उनकी कमजोरी दूर होती है और पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है, बल्कि दूध उत्पादन और शारीरिक विकास में भी मदद मिलती है. आइए जानते हैं कैसे आप इसके इस्तेमाल से पशुओं को फिट रखने के साथ ही दूध का उत्पादन भी बढ़ा सकते हैं.
ग्रामीण इलाकों में महुआ का पेड़ लंबे समय से लोगों की कमाई और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा रहा है. महुआ के फूलों का इस्तेमाल लोग कई तरह से करते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि यह पशुपालन में भी बहुत काम आता है. गाय और भैंस के लिए महुआ के फूल और इसके दूसरे प्रॉडक्ट्स काफी फायदेमंद माने जाते हैं. यही वजह है कि गांव के पशुपालक सालों से इसका इस्तेमाल अपने जानवरों के चारे में सीमित मात्रा में करते आ रहे हैं.

पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि महुआ में कई तरह के जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो पशुओं को तुरंत ताकत और ऊर्जा देने का काम करते हैं. इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत से पशुपालक इसे चारे के साथ मिलाकर अपने जानवरों को खिलाते हैं. हालांकि, इसका इस्तेमाल हमेशा एक तय और संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए ताकि पशुओं को इसका पूरा फायदा मिल सके और कोई नुकसान न हो.

महुआ के फूलों में नेचुरल शुगर और कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में होते हैं. ये तत्व पशुओं को चुस्त-दुरुस्त रखने और एनर्जी देने में मदद करते हैं. खेतों में काम करने वाले बैलों या ज्यादा दूध देने वाली गाय-भैंसों को अतिरिक्त ताकत की जरूरत होती है. ऐसे में हल्की मात्रा में महुआ खिलाने से उन्हें अच्छी ताकत मिलती है. यही वजह है कि आज भी कई गांवों में पशुओं को महुआ के सूखे फूल खिलाने की पुरानी परंपरा चली आ रही है.
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पशुपालकों का ऐसा मानना है कि संतुलित चारे के साथ महुआ देने से दूध देने वाले जानवरों की सेहत बहुत अच्छी रहती है. जब पशु को अंदर से पूरा पोषण मिलता है, तो वह तंदुरुस्त रहता है और इससे दूध के उत्पादन पर भी बढ़िया असर पड़ता है. हालांकि, दूध बढ़ाने के लिए सिर्फ महुआ पर ही निर्भर नहीं होना चाहिए. इसके साथ-साथ पशु को हरा चारा, भूसा, दाना, मिनरल मिक्सचर और भरपूर साफ पानी देना भी बेहद जरूरी है.

महुआ का इस्तेमाल पशुओं के डाइजेशन यानी पाचन तंत्र को ठीक रखने में भी मददगार माना जाता है. कई ग्रामीण पशुपालक इसे चारे में मिलाकर देते हैं, जिससे जानवर बड़े चाव से और आसानी से चारा खा लेते हैं. अगर पशु का पेट और हाजमा सही रहेगा, तो वह जो भी खाएगा उसका पूरा पोषण उसके शरीर को लगेगा. इससे उसकी सेहत और दूध देने की क्षमता दोनों में सुधार होता है.

कई बार बदलते मौसम या किसी बीमारी की वजह से जानवर सुस्त और कमजोर हो जाते हैं. ऐसे समय में उन्हें ऐसा आहार देना चाहिए जिससे शरीर को तुरंत ताकत मिले. महुआ के फूलों में मौजूद पोषक तत्व इस कमजोरी को दूर करने में मदद करते हैं. इसीलिए पशुपालक इसे दूसरे दानों या चारे के साथ मिलाकर बीमार या कमजोर पशु को देते हैं, जिससे जानवर जल्दी एक्टिव और रिकवर हो जाता है.

तेजी से बड़े हो रहे बछड़ों और छोटे मवेशियों के लिए सही पोषण मिलना बहुत जरूरी होता है. चूंकि महुआ एनर्जी का एक बहुत अच्छा जरिया है, इसलिए जब इसे संतुलित चारे के साथ मिलाकर दिया जाता है, तो यह पशुओं के शारीरिक विकास में काफी मदद करता है. ध्यान रहे कि इसके साथ बाकी जरूरी पोषक तत्व भी चारे में शामिल होने चाहिए.

महुआ के बीजों से जब तेल निकाल लिया जाता है, तो उसके बाद जो खली बचती है, उसका इस्तेमाल भी कई इलाकों में पशु आहार के रूप में किया जाता है. लेकिन इस खली को खिलाते समय हमेशा विशेषज्ञों या डॉक्टरों की सलाह जरूर लेनी चाहिए. अगर सही और सुरक्षित तरीके से तैयार की गई खली खिलाई जाए तो यह बहुत उपयोगी होती है, वहीं इसका गलत या ज्यादा इस्तेमाल जानवरों को नुकसान भी पहुंचा सकता है.