बलिया: आज हम आपको रंगमंच की दुनिया में बलिया से गर्व और प्रेरणा से भरी एक बड़ी उपलब्धि के बारे में बताने जा रहे है. जी हां सीमित सीटों और कड़े चयन प्रक्रिया वाले प्रतिष्ठित भारतेंदु नाट्य अकादमी, लखनऊ में जिले के दो युवा रंगकर्मियों ने अपनी प्रतिभा का परचम लहरा दिए है. संकल्प संस्था से जुड़े ट्विंकल गुप्ता और शुभम सिंह का चयन यह साबित करता है कि जुनून, निरंतर अभ्यास और लक्ष्य के प्रति समर्पण किसी भी सपने को हकीकत में बदल सकता है. यह सफलता न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि जिले के उन तमाम युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो अभिनय और रंगकर्म के क्षेत्र में अपना भविष्य देख रहे हैं. आइए जानते हैं रंगमंच की दुनिया में इतिहास रचने वाली ट्विंकल गुप्ता ने क्या कुछ कहा…
तीसरी बार में मिली सफलता
रंगकर्मी ट्विंकल गुप्ता ने कहा कि ट्विंकल को लगातार दो बार असफलता मिली, लेकिन उससे मायूस न होने, बल्कि प्रेरणा लेकर प्रयास करती रही और तीसरी बार में उन्हें सफलता हासिल कर ली. ट्विंकल ने कहा कि, उनका चयन भारतेंदु नाट्य अकादमी में हो चुका हैं. हालांकि अकादमी में प्रवेश के लिए कई चरणों से गुजरना पड़ता है इसमें अखिल भारतीय स्तर पर केवल 20 सीट ही था जिसमें संकल्प संस्था के दो रंग कर्मियों ने अपना स्थान बना लिया है. जिस दिन ट्विंकल का परीक्षा वह रात मानो इन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था. यह अपना परीक्षा अपने मित्रों के साथ देने गई थी, रात के 12 बजे के बाद ट्विंकल का भाई इनको फोन कर बताता है कि, दादी उठ नहीं रही है.
कब देबू हमार साड़ी
बाद में पता चला कि, इनकी दादी भगवान को प्यारी हो गई है, ट्विंकल को दादी से बहुत प्रेम था, दादी, ट्विंकल के बिन और ट्विंकल दादी के बगैर नहीं रह पाती थी. उन्होंने कहा कि, जब वह प्रेक्टिस कर घर जाती थी, सबसे पहले उनकी दादी भोजपुरी में पूछती थी कि खाना खईले हउ. उनकी साड़ी पहनकर ट्विंकल नाट्य में भाग लेती थी, तो जाने के बाद दादी कहती थी कि साड़ी के काम हो गईल, कब देबू हमार साड़ी, तो ट्विंकल कहती थी, बाद में तोहार साड़ी देब. कभी-कभी दादी ऐसा काम करती थी, जिनको देखने पर लगता था कि, यह बहुत अच्छा एक्टिंग है, तो उस पर ट्विंगल नाटक तैयार करती थी. दादी के जाने से ट्विंकल टूट चुकी थी, इनका कहना है कि, कम से कम उनके रहते में दादी की मृत्यु हुई होती, ताकि उनको पकड़कर रो लेती और दादी को अंतिम विदाई दे सकती, हालांकि दोस्तों के कहने पर उन्होंने एग्जाम दे दिया, निवेदन करने पर उनका परीक्षा सबसे पहले ही हो गया था, हालांकि इनका नंबर सभी के बाद में था.
ट्विंकल का सफर
आपको बताते चले कि ट्विंकल, सतीश चंद्र कॉलेज बलिया से हिंदी से MA की पढ़ाई पूरी कर चुकी है. अब वह रंग कर्मी की दुनिया में मास्टर डिग्री लेने जा रही है. यह सन 2015 में रंगकर्म से जुड़ गई और 2016 में नाट्य विधा से जुड़ गई. हालांकि, ट्विंकल को बलिया के आशीष त्रिवेदी से मुलाकात हुई. ट्विंकल की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी. इसलिए आशीष ने इस बच्ची का हुनर देखकर एक नाटक में प्रतिभाग करने का अवसर दिया और तब से लेकर आज तक आशीष त्रिवेदी ने अपने बच्चों से फीस नहीं लिया है. इससे पहले ट्विंकल दर्जनों नाटकों में अभिनय व निर्देशन कर चुकी है. यह राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय वाराणसी सेंटर से इंडियन क्लासिकल थिएटर में एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स भी कर चुकी हैं. यही नहीं, ट्विंकल को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से नेशनल स्कॉलरशिप (2 लाख) अवार्ड भी मिल चुका है. ट्विंकल का सपना है कि, रंग मंच को उस लेवल पर लेकर जाए की हर किसी को यह समझ आए की रंगमंच हर व्यक्ति के लिए जरूरी है.
शुरुआत से ही था एक्टिंग में रुझान
यह भारंगम और कई संभागीय नाट्य प्रतियोगिताएं कर चुकी हैं. अक्सर राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव संकल्प संस्था की ओर से बलिया में कराया जाता है जिसमें देश-विदेश से कलाकार आते हैं और उसका ट्विंकल आयोजक बनती हैं. यह वातावरण बदलने के साथ मंच प्रबंधन की भी भूमिका निभाती हैं. संकल्प संस्था के निदेशक व ट्विंकल के गुरु आशीष त्रिवेदी ने कहा कि जब ट्विंकल इंटरमीडिएट की छात्रा थी, तब वह इनके पास आई थी. इसने डांस से शुरुआत की, लेकिन रुझान एक्टिंग के तरफ था.
इसी दौरान, “आषाढ़ का एक दिन” नमक बड़ा नाट्य हुआ था, जिसमें ट्विंकल का सबसे शानदार भूमिका रहा. उस समय बलिया के लोगों ने कहा कि, यह बच्ची आगे जा सकती है. हालांकि, आशीष के लिए सभी बच्चे समान थे. दुनिया का सबसे बड़ा रंगमंच पर बलिया से पहली बार यही लड़की गई थी. फिलहाल, उक्त सफलता ट्विंकल के साथ गाजीपुर से बलिया आकर आशीष त्रिवेदी के नेतृत्व में पढ़ाई करने वाले शुभम सिंह को भी मिली है.