प्रयागराज के एनसीजेडसीसी (NCZCC) में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, मध्य प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय जनजातीय उत्सव के दूसरे दिन ऐतिहासिक नृत्य-नाटिका ‘महाबली छत्रसाल’ का मंचन किया गया। प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों को बुंदेलखंड के इतिहास और महाराजा छत्रसाल के जीवन संघर्ष से रूबरू कराया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. पतंजलि मिश्रा और अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद मंच पर महाराजा छत्रसाल के जीवन पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की गई, जिसमें उनके जन्म से लेकर मुगल शासन के खिलाफ संघर्ष और बुंदेलखंड में स्वराज की स्थापना तक की कहानी दिखाई गई। शिवाजी से प्रेरणा लेकर छेड़ा था संघर्ष नाटक में दिखाया गया कि बचपन से ही महाराजा छत्रसाल में वीरता और स्वाभिमान की भावना थी। छत्रपति शिवाजी से प्रेरित होकर उन्होंने सीमित संसाधनों में अपनी सेना तैयार की और मुगल शासन के खिलाफ संघर्ष शुरू किया। प्रस्तुति में गुरु प्राणनाथ के साथ उनके आध्यात्मिक संबंध, पेशवा बाजीराव का सहयोग, मस्तानी का नृत्य, साहित्य प्रेम और न्यायप्रिय शासन को भी प्रभावशाली ढंग से मंचित किया गया। युद्ध दृश्य और बुंदेली लोक कला ने जीता दिल नृत्य-नाटिका में बुंदेली राई नृत्य, आल्हा गायन, तलवारबाजी, युद्ध के दृश्य, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था और सजीव संगीत ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कई दृश्यों पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। अंतिम दृश्य में महाराजा छत्रसाल द्वारा बुंदेलखंड को मुगलों की दासता से मुक्त कराने और उनके अंतर्ध्यान होने का मार्मिक चित्रण किया गया। कलाकारों के अभिनय को मिली सराहना नाटक में आशीष ओझा ने महाराजा छत्रसाल, पीयूष पांडा ने सूत्रधार, साहिल श्रीवास्तव ने औरंगजेब, धन्नूलाल सिन्हा ने चंपतराय, ज्योति रैकवार ने लाल कुंवारी और योगेश तिवारी ने महावीर मामा की भूमिका निभाई। नाटक का निर्देशन चंद्र माधव बारीक ने किया, जबकि लेखन भगवतीलाल राजपुरोहित का था। संगीत निर्देशन मिलिंद त्रिवेदी और प्रकाश परिकल्पना अतुल मिश्रा ने की।
Source link
प्रयागराज में 'महाबली छत्रसाल' की मंचीय प्रस्तुति:मुगलों के खिलाफ संघर्ष और स्वराज की गाथा ने बांधा समां