अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के साथ ही एक ऐसा नाम भी ट्रस्ट से अलग हो गया, जो रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले हुए ऐतिहासिक अनुष्ठानों का प्रमुख चेहरा रहा था. जनवरी 2024 में जब अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां चल रही थीं, तब 16 जनवरी से शुरू हुए वैदिक अनुष्ठानों में डॉ. अनिल मिश्रा और उनकी पत्नी उषा मिश्रा को ‘प्रधान यजमान’ बनाया गया था.
उन्होंने सरयू स्नान, प्रायश्चित, संकल्प, कर्मकुटी पूजा, हवन, कलश पूजन और अन्य वैदिक अनुष्ठानों में भाग लेकर पूरे पूर्व-अनुष्ठान का नेतृत्व किया. वहीं 22 जनवरी 2024 को हुए मुख्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य यजमान बने थे, जबकि काशी के विद्वान आचार्य लक्ष्मीकांत दीक्षित ने मुख्य वैदिक अनुष्ठान का संचालन किया था. उधर, चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच समिति यानी SIT ने अनिल से भी सवाल किए थे.
SIT ने अनिल मिश्रा से आठ प्रमुख सवाल पूछे-
– क्या आप नकदी की गिनती के दौरान मौके पर मौजूद रहते थे?
– क्या आपकी मौजूदगी में ही गिनी गई नकदी को स्ट्रॉन्ग रूम/निर्धारित स्थान तक ले जाया जाता था?
– क्या आपको कभी चढ़ावे की नकदी में कथित चोरी या गड़बड़ी की सूचना मिली थी?
– कैश काउंटिंग में शामिल कर्मचारियों का चयन और सत्यापन किस प्रक्रिया से होता था?
– गिनती पूरी होने के बाद क्या कर्मचारियों की तलाशी ली जाती थी?
– क्या कैश काउंटिंग सेंटर के सभी सीसीटीवी कैमरे हर समय चालू रहते थे?
– क्या किसी भी परिस्थिति में कैश काउंटिंग सेंटर के कैमरे बंद किए जाते थे? यदि हां, तो किसके निर्देश पर?
– कैश की गिनती, मिलान, रिकॉर्ड और जमा कराने की पूरी प्रक्रिया में आपके अलावा किन-किन लोगों की भूमिका होती थी?
बता दें डॉ. अनिल मिश्रा श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के समय से ही उसके प्रमुख सदस्यों में शामिल रहे. मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर के रहने वाले डॉ. मिश्रा पिछले चार दशक से अयोध्या में होम्योपैथिक चिकित्सक के रूप में कार्यरत रहे हैं.
उन्होंने 1981 में बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BHMS) की डिग्री प्राप्त की और उत्तर प्रदेश होम्योपैथिक बोर्ड के रजिस्ट्रार तथा गोंडा के जिला होम्योपैथिक अधिकारी जैसे पदों पर भी सेवाएं दीं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से लंबे समय से जुड़े रहे डॉ. मिश्रा को राम मंदिर आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ताओं में भी गिना जाता है.