एक ही हाथ लेकर पैदा हुई थी। स्कूल जाने लगी तो दूसरे बच्चे रोज उसका मजाक उड़ाते। लगा कि उसका आत्मविश्वास और धैर्य जवाब दे जाएगा। एक हाथ न होना सामाजिक संघर्ष का रूप लेता जा रहा था। एक बार तो डर के मारे उसके पिता उसे रायपुर से करीब 120 किमी दूर बिलासपुर बीएससी करने जाने नहीं दे रहे थे। लेकिन, आज वहीं बिटिया बीएचयू में पीएचडी कर रही है। सिंधियों को जैविक तौर पर 5000 साल प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता से जोड़कर उसने एक नई पहचान दे दी है। उसने स्कूल-कॉलेज के साथ ही अपने धैर्य की भी परीक्षा पास कर ली।