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Sambhal Land Scam: उत्तर प्रदेश के संभल में 101 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (ईओ) और वर्तमान सहायक नगर आयुक्त राजकुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है. आरोप है कि फर्जी पट्टों और राजस्व अभिलेखों में हेरफेर के जरिए ग्राम समाज की करीब 38 बीघा जमीन पर अवैध कब्जा कराने में उनकी भूमिका रही. इस मामले में पहले ही 31 नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी.
101 करोड़ की सरकारी जमीन घोटाले में बड़ा एक्शन, सहायक नगर आयुक्त राजकुमार गुप्ता गिरफ्तार
संभल: उत्तर प्रदेश के संभल में करीब 101 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (ईओ) और वर्तमान में शाहजहांपुर नगर निगम में तैनात सहायक नगर आयुक्त राजकुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है. वही पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है.
क्या है पूरा मामला?
मामला संभल-मुरादाबाद मार्ग स्थित तकिया गुसाईं की करीब 38 बीघा (2.367 हेक्टेयर) ग्राम समाज की जमीन से जुड़ा है. प्रशासन के मुताबिक, इस जमीन की मौजूदा बाजार कीमत करीब 101 करोड़ रुपये है तो वही आरोप है कि फर्जी पट्टों, कूटरचित दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर इस सरकारी जमीन को निजी लोगों के नाम दर्ज करा दिया गया.
1967 के कथित पट्टे से शुरू हुई जांच
जांच में सामने आया कि इस जमीन से जुड़ा कथित पट्टा वर्ष 1967 का बताया गया था और बाद में इसी के आधार पर 2008 में नामांतरण कराया गया. हालांकि प्रशासन का दावा है कि दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों में गंभीर अनियमितताएं मिली हैं. जिसके बाद मामले की दोबारा जांच शुरू हुई और जमीन को ग्राम समाज के खाते में दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की गई.
राजकुमार गुप्ता पर क्या हैं आरोप?
पुलिस के मुताबिक, राजकुमार गुप्ता जब संभल नगर पालिका में ईओ थे, तब सरकारी जमीन से जुड़े मुकदमे में उन्होंने सरकारी पक्ष की प्रभावी पैरवी नहीं की. वहीं जांच एजेंसियों का आरोप है कि इससे कथित तौर पर भू-माफियाओं को फायदा पहुंचा और इसी आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया है.
31 नामजद समेत कई लोग जांच के दायरे में
बता दें कि इस मामले में पहले ही 31 नामजद और कुछ अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. इनमें तत्कालीन अधिकारी, कर्मचारी और कथित लाभार्थी भी शामिल हैं. हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी.
प्रशासन की नजर पूरे नेटवर्क पर
हालांकि अभी जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी पट्टा कैसे तैयार हुआ, नामांतरण की प्रक्रिया किस स्तर पर हुई और इस पूरे प्रकरण में किन-किन अधिकारियों व अन्य लोगों की भूमिका रही. पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.
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