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सुल्तानपुर में एक ऐसा हनुमान जी का मंदिर है जिसका इतिहास लगभग 70 वर्ष पुराना है. इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां पर पहले आजमगढ़, बाराबंकी, बिहार समेत कई अन्य प्रदेश के व्यापारी व्यापार करने के लिए आते थे. जब उनको मुनाफा हुआ तो व्यापारियों और गांव वालों के सहयोग से इस मंदिर का निर्माण कर दिया गया. यहां कि सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर के जो पुजारी हैं काफी बुजुर्ग हैं और 20 साल से इसी अवस्था में मंदिर की सेवा कर रहे हैं. तो ऐसे मैं आज हम जानेंगे इस हनुमान मंदिर का क्या है इतिहास और किस तरह से लोगों की आस्था जुडी हुई है.
सुल्तानपुरः भारत प्राचीन काल से ही धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं वाला देश रहा है. यहां पर कई ऐसी प्राचीन मूर्तियां स्थल और धार्मिक मान्यताएं हैं जो इस बात का प्रमाण देता है कि लोगों की अभी भी गहरी आस्था भगवान में है. इसी तरह यूपी के सुल्तानपुर में एक ऐसा हनुमान जी का मंदिर है जिसका इतिहास लगभग 70 वर्ष पुराना है. इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां पर पहले आजमगढ़, बाराबंकी, बिहार समेत कई अन्य प्रदेश के व्यापारी व्यापार करने के लिए आते थे.
जब उनको मुनाफा हुआ तो व्यापारियों और गांव वालों के सहयोग से इस मंदिर का निर्माण कर दिया गया. यहां कि सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर के जो पुजारी हैं काफी बुजुर्ग हैं और 20 साल से इसी अवस्था में मंदिर की सेवा कर रहे हैं. तो ऐसे मैं आज हम जानेंगे इस हनुमान मंदिर का क्या है इतिहास और किस तरह से लोगों की आस्था जुडी हुई है.
व्यापारियों के साथ जुडी है कहानी
मंदिर के पुजारी बाबा कोमल दास लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताते हैं कि सुल्तानपुर के भपटा गांव में स्थित हनुमान जी का यह मंदिर जो आज से लगभग 70 वर्ष पहले बनवाया गया अपने आप में दिव्य स्थल है. यहां पर सिर्फ भपटा गांव के लोग ही दर्शन और पूजन करने के लिए नहीं आते बल्कि आसपास कई अन्य जिलों के लोग भी आते हैं. इस मंदिर के निर्माण के पीछे भी कहानी स्थानीयता पर सीमित नहीं होती बल्कि इसको बनाने में आजमगढ़, रायबरेली, बाराबंकी, सुल्तानपुर समेत कई जिलों के साथ-साथ बिहार तक के व्यापारियों का आस्था जुडी हुई है.
सुल्तानपुर के इस मंदिर पर सनातन धर्म से संबंधित धार्मिक ग्रंथो की उपलब्धता रहती है यहां पर श्री रामचरितमानस, बाल्मीकि रामायण, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड जैसे कई धार्मिक पुस्तकें उपलब्ध रहती हैं. जिन लोगों को श्री रामचरितमानस का अखंड पाठ करना होता है वह मंदिर के पुजारी से संपर्क करके ले भी जाते हैं. इसके साथ ही ढोल मंजीरा आदि सामान भी मंदिर पर मिल जाएगा.
बंधी हैं दर्जनों घंटियां
बाबा कोमल दास बताते हैं कि इस मंदिर में लोगों की आस्था काफी गहरी जुड़ी हुई है यही वजह है कि यहां पर दर्जनों घंटियां और घंटे श्रद्धालुओं द्वारा बांधे गए हैं. इस घंटे और घंटियां के पीछे का रहस्य है कि यहां पर बांधे गए यह घंटे और घंटियां लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण होने के बाद बांधे गए हैं जो लोग भगवान बजरंगबली से मन्नत मांगते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं तो वह लोग यहां पर घंटे और घंटियां मानते हैं. यही वजह है कि आज पूरे मंदिर प्रांगण में दर्जनों घंटे बंधे हुए हैं. इसके साथ ही यहां पर अन्य देवी देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं जहां पर आसपास के लोग पूजा पाठ करते हैं. मंदिर के साथ-साथ यहां पर रहने वाले पुजारी बाबा कोमल दास काफी वृद्ध हैं. श्रद्धालु दिग्विजय श्रीवास्तव बताते हैं कि वह पिछले 20 वर्षों से इसी अवस्था में हैं लेकिन हनुमान जी की कृपा से वे अभी मंदिर की सेवा में लगे हुए हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें