औरैया के बिधूना थाना क्षेत्र में लगभग 13 वर्ष पुराने किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र ने दोषी रफीक को आजीवन कारावास और 35 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अपहरण में सहयोग करने वाली महिला छिदाना को सात वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया है। अभियोजन पक्ष के विशेष लोक अभियोजक मृदुल मिश्रा के अनुसार, वादी ने बिधूना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि 3 जून 2013 को उसकी नाबालिग पुत्री हाईस्कूल की परीक्षा देने के बाद बिधूना बाजार जा रही थी, तभी एक अज्ञात व्यक्ति उसे बहला-फुसलाकर ले गया। काफी खोजबीन के बाद भी उसका पता नहीं चल सका था। पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की, जिसमें कानपुर देहात के रसूलपुर थाना रसूलाबाद निवासी रफीक का नाम सामने आया। उसे गिरफ्तार कर किशोरी को बरामद किया गया। इसके अतिरिक्त, रसूलपुर, कानपुर देहात निवासी छिदाना पत्नी राजू पुत्री नन्हू को भी अपहरण में सहयोग का आरोपी बनाया गया। दोनों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। मुकदमे का विचारण विशेष न्यायालय पॉक्सो अधिनियम में हुआ। बुधवार को इस मामले में निर्णय सुनाया गया। विशेष लोक अभियोजक मृदुल मिश्रा ने किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म के दोषी को कठोर सजा देने का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि दोषी न्यायालय में लंबे समय तक अनुपस्थित रहा, जिससे निर्णय में अधिक समय लगा। छिदाना ने भी किशोरी के अपहरण और उसे छिपाने का अपराध किया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र ने रफीक को आजीवन कारावास और 35 हजार रुपये अर्थदंड तथा छिदाना को 7 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। दोनों दोषियों को जिला कारागार इटावा भेज दिया गया है।
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औरैया में दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद:13 साल पुराने अपहरण-दुष्कर्म मामले में फैसला, महिला सहयोगी को 7 साल कैद