गोरखपुर में शहादत-ए-कर्बला की याद में मनाए जा रहे मोहर्रम की नवीं तारीख पर गुरुवार देर रात पूरा शहर गम और अकीदत के रंग में डूबा नजर आया। मियां बाजार, रेती चौक, बक्शीपुर, अलीनगर, रसूलपुर, शाहमारूफ, खूनीपुर, तुर्कमानपुर, नखास, इस्माईलपुर समेत शहर के कई इलाकों से ताजिए, आलम और मातमी जुलूस निकाले गए। हजारों अकीदतमंद जुलूसों में शामिल हुए। “या हुसैन” की सदाओं के बीच लोगों ने हजरत इमाम हुसैन और शुहदाए कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की। देर रात तक शहर की सड़कों पर मातमी जुलूसों की रौनक बनी रही। शाही जुलूस बना सबसे बड़ा आकर्षण शहर में निकले सभी जुलूसों के बीच इमामबाड़ा स्टेट का ऐतिहासिक शाही जुलूस लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। इमामबाड़ा स्टेट के सातवें गद्दीनशीन एवं सज्जादानशीन सैय्यद अयान अली शाह ने परंपरा के अनुसार एहराम पहनकर जुलूस की अगुवाई की। उन्होंने विभिन्न मजारों पर फातिहा पढ़ी और देश में अमन-चैन, भाईचारा, तरक्की और खुशहाली की दुआ मांगी। रास्ते में कई जगह उनका फूल-मालाओं से स्वागत भी किया गया। थीम वाले ताजिए देखने उमड़ी भीड़ इस बार पारंपरिक ताजियों के साथ कई थीम आधारित ताजिए भी लोगों का ध्यान खींचते रहे। भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस विक्रांत की तर्ज पर बनाया गया ताजिया और मक्का की आकृति वाला ताजिया खास आकर्षण रहे। इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। एक ताजिए में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरें भी लगाई गई थीं। यह ताजिया भी पूरे जुलूस के दौरान चर्चा का विषय बना रहा। नौहाख्वानी और मातम से गमगीन रहा माहौल जुलूसों में शामिल अंजुमनों ने नौहाख्वानी और मातम के जरिए कर्बला की याद ताजा की। अकीदतमंदों ने सीना-ज़नी कर हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को याद किया। “या हुसैन” की सदाओं और मातमी धुनों से पूरा माहौल गमगीन बना रहा। जगह-जगह लगीं सबीलें मोहर्रम के मौके पर शहरभर में जगह-जगह सबीलें लगाई गईं। राहगीरों और अकीदतमंदों को ठंडा पानी, शरबत, तबर्रुक और बिरयानी बांटी गई। कई जगह लोगों ने फूल बरसाकर जुलूसों का स्वागत किया और भाईचारे का संदेश दिया। पुलिस-प्रशासन रहा अलर्ट मोहर्रम के जुलूसों को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। जुलूस मार्गों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। वरिष्ठ अधिकारी देर रात तक मौके पर मौजूद रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे। नगर निगम की टीमें भी सफाई व्यवस्था संभालने में जुटी रहीं। नवीं मोहर्रम के जुलूसों के जरिए हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी, सब्र, हक, इंसाफ और इंसानियत का पैगाम लोगों तक पहुंचा। देर रात तक गोरखपुर की फिजाएं “या हुसैन” की सदाओं से गूंजती रहीं और शहर ने गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की।
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गोरखपुर में नवीं मोहर्रम पर निकले ताजिए और मातमी जुलूस:INS विक्रांत- मक्का के ताजियों ने खींचा ध्यान, 'या हुसैन' की सदाओं से गूंजा शहर