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Sultanpur News: यूपी के सुल्तानपुर में स्थित गौरव झील आज अपना अस्तित्व खोता जा रहा है. इस झील में विदेशी पक्षियों का प्रवास होता रहा है. खासकर सर्दी के मौसम में कई विदेशी पक्षियों यहां पर आते थे लेकिन वर्तमान में साफ सफाई न होने की वजह से और इसमें जलकुंभी,जहरीले घासें उगाने की वजह से अब विदेशी पक्षियों का प्रवास होना रुक गया है.
सुल्तानपुर: जैसे-जैसे आबादी बढ़ रही है वैसे-वैसे प्राकृतिक नदियों पहाड़ों और झीलों का दोहन भी हो रहा है. इसका जीता जागता उदाहरण है सुल्तानपुर जिले की गौरव झील. गांव वाले बताते हैं कि यहां पर पहले कई कुंटल कमल के फूल खिलते थे जिनका स्थानीय लोग बाजार में ले जाकर व्यापार भी करते थे. लेकिन जैसे-जैसे आबादी बढ़ी और देखरेख और संरक्षण के अभाव में यह गौरव झील आज अपने अस्तित्व को खो रही है और यही वजह है कि अब यहां पर कमल का फूल भी विलुप्त हो जा रहा है. ऐसे में आज हम जानेंगे कि गौरव झील का क्या इतिहास रहा है और यहां पर किस तरह से कमल के फूल का व्यापार होता था.
विदेशी पक्षियों का प्रवास
इसी गांव के रहने वाले बसंतराम विश्वकर्मा ने बताया कि इस झील में विदेशी पक्षियों का प्रवास होता रहा है. खासकर सर्दी के मौसम में कई विदेशी पक्षियों यहां पर आते थे लेकिन वर्तमान में साफ सफाई न होने की वजह से और इसमें जलकुंभी,जहरीले घासें उगाने की वजह से अब विदेशी पक्षियों का प्रवास होना रुक गया है जो की प्रशासन के अनदेखी का शिकार हो रहा है.
कभी उगता था कमल का फूल
सुल्तानपुर जिले के धनपतगंज ब्लॉक के अंतर्गत स्थित यह गौरव झील एक ऐतिहासिक झील है. यही के रहने वाले विश्वनाथ लोकल 18 से बताते हैं कि इस झील का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है. यहां पर पहले बारिश के मौसम में कमल की अच्छी पैदावार होती थी लेकिन समय के साथ-साथ अब यहां कमल का उत्पादन विलुप्त सा हो गया है. इसके पीछे की वजह है कि देखरेख और साफ सफाई का अभाव. पहले यहां के गांव वाले कमल उत्पादन के व्यापार में संलिप्त थे और कमल तोड़कर बाजार ले जाते थे और उससे अच्छी कमाई भी करते थे. सैकड़ों कुंतल कमल का उत्पादन इस झील से होता था.
साफ-सफाई का अभाव
ऐंजर ग्राम सभा में स्थित इस गौरव झील में साफ सफाई न होने की वजह से यह झील अब गंदगी शिकार हो रही है और अपने अस्तित्व को भी खोती चली जा रही है. ऐसे में यहां के स्थानीय लोगों की मांग है कि इस झील की साफ सफाई कराई जाए ताकि किसी भी प्रकार से यह अपने अस्तित्व को ना खोने पाए. ग्रामीण उमा प्रकाश तिवारी कहते हैं कि अगर इस झील का पुनरुद्धार कर दिया जाए तो निश्चित रूप से यहां पर न सिर्फ कमल की पैदावार फिर से शुरू हो सकेगी बल्कि पर्यटन स्थल के रूप में भी इसे विकसित किया जा सकेगा.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…और पढ़ें