उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुए ललिता हत्याकांड मामले में लखनऊ तक हलचल तेज हो गई है. मामले में दलित बेटी की हत्या के आरोपियों को लेकर 8 जुलाई को कई लोग प्रदर्शन कर रहे थे, जिसके बाद मेरठ के SSP अविनाश पांडेय ने आरोपियों की जगह प्रदर्शनकारियों को ही चपड़ जड़ना और पीटना शुरू कर दिया. एसएसपी ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को बंदी वाहन के डालकर जमकर पीटा, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
कई सामाजिक दल न्याय दिलाने के लिए कलेक्ट्रेट पर धरना करने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस के समझाने के बाद भी प्रदर्शनकारी नहीं हटे, तो पुलिस ने उनपर लाठीचार्ज कर दिया. इसके बाद एसएसपी अविनाश पांडेय ने मौके पर पहुंचते ही रवि गौतम पर थप्पड़ों की बारिश कर दी.
SSP साल 2015 बैच के अफसर, कर रखी है बीटेक की पढ़ाई
इस मामले पर अखिलेश यादव ने ट्वीट करते हुए लिखा की बीजेपी राज में पुलिस अन्याय का रिकॉड तोड़ रही है. वहीं चंद्रशेखर आजाद और बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि व्यक्ति को कानून के दायरे में रहकर काम करना चाहिए और कानून को अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए. चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वे खुद मेरठ पहुंचेंगे और न्याय दिलाने के लिए विरोध प्रदर्शन करेंगे. इस घटना से एसएसपी अविनाश पांडेय काफी चर्चा में है. एसएसपी का जन्म 3 फरवरी 1988 को लखीमपुर खीरी जिले में हुआ था.
उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक किया है. वे साल 2015 बैच के अफसर हैं और इनकी पहली तैनाती गाजियाबाद में एसपी सिटी और प्रयागराज महाकुंभ में हुई थी. इसके बाद 2019 में वे एसपी देहात के पद पर रहे और फिर लखनऊ में इनकी तैनाती हुई.
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पहले भी खालिस्तानी आतंकियों के एनकाउंटर लेकर रहे चके हैं चर्चा में
एसएसपी अविनाश पांडेय को अपने काम के चलते और बेहतर पुलिसिंग के लिए दो बार डीजीपी प्रशंसा चिह्न से सम्मानित किया जा चुका है. उन्हें 15 अगस्त 2022 को सिल्वर मेडल और 26 जनवरी 2025 को गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया. एसएसपी पीलीभीत के पूरनपुर इलाके में खालिस्तानी आतंकियों के एनकाउंटर को लेकर भी चर्चा में रहे हैं. इस मामले में पंजाब में पुलिस चौकी पर ग्रेनेड से हमला करने वाले आरोपी पीलीभीत भागकर आ गए थे, जिसके बाद उनका एनकाउंटर कर दिया गया.
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