उत्तर प्रदेश की सोनभद्र पुलिस और एसटीएफ लखनऊ यूनिट को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. संयुक्त कार्रवाई में अंतरराज्यीय गांजा तस्करी के एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए छह तस्करों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने उनके कब्जे से एक करोड़ से ज्यादा का अवैध गांजा, एक डीसीएम, एक कार, छह मोबाइल फोन, दो आईफोन और नकदी बरामद की है.
बरामद माल की कुल अनुमानित कीमत एक करोड़ 16 लाख रुपये बताई जा रही है. पुलिस के मुताबिक यह गिरोह ओडिशा से गांजा लाकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में सप्लाई करता था. गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कई गंभीर मुकदमे भी दर्ज हैं.
ओडिशा से यूपी लाया जा रहा था गांजा
पुलिस को सूचना मिली थी कि ओडिशा से भारी मात्रा में गांजा डीसीएम वाहन के जरिए उत्तर प्रदेश लाया जा रहा है. सूचना के आधार पर रॉबर्ट्सगंज पुलिस और एसटीएफ की टीम ने चेकिंग अभियान चलाया और मुखबिर की निशानदेही पर एक डीसीएम तथा एक स्विफ्ट डिजायर कार को रोककर तलाशी ली. तलाशी के दौरान डीसीएम में जड़ी-बूटी की बोरियों के बीच छिपाकर रखा गया 08 कुंतल 684 ग्राम अवैध गांजा बरामद हुआ. बरामद गांजे की अनुमानित कीमत लगभग 80 लाख 60 हजार रुपये आंकी गई है. वहीं डीसीएम, कार, मोबाइल फोन, आईफोन और नकदी समेत कुल बरामदगी का मूल्य लगभग एक करोड़ 16 लाख रुपये बताया गया है.
जड़ी-बूटी में छिपाकर लाते थे
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि यह एक संगठित अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क है, जो ओडिशा से गांजा खरीदकर उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जनपदों में खपाता था. गिरोह का संचालन मुख्य सरगना द्वारा किया जा रहा था, जबकि उसके सहयोगी परिवहन, निगरानी और सप्लाई की जिम्मेदारी संभालते थे.
पुलिस के अनुसार तस्कर गांजे को जड़ी-बूटी और अन्य सामान के बीच छिपाकर ले जाते थे, ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके. तस्करी के दौरान पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक लग्जरी कार को एस्कॉर्ट वाहन के रूप में आगे चलाया जाता था.
सिम और मोबाइल लगातार बदलते थे
पूछताछ में आरोपियों से यह भी पता चला कि गिरोह पहचान छिपाने के लिए लगातार मोबाइल नंबर और सिम बदलता था तथा आपसी संपर्क के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल करता था. पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों, सप्लायरों और खरीददारों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है. गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय भेज दिया गया है. पुलिस का दावा है कि इस कार्रवाई से प्रदेश में सक्रिय एक बड़े मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है.
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