इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1988 के एक पुराने आपराधिक मामले में देव सिंह और एक अन्य आरोपीयों को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की अदालत ने यह फैसला सुनाया। ललितपुर के मेहरौनी थाना क्षेत्र में 3 दिसंबर 1986 को एक गांव के कुएं से नवजात शिशु का शव बरामद हुआ था। इस आधार पर पहले अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई। बाद में जांच के दौरान पीड़िता (जिसकी उम्र को लेकर विवाद रहा) और उसकी मां के बयानों के आधार पर देव सिंह व नब्बू के खिलाफ बलात्कार, हत्या और सबूत मिटाने की धाराओं में मुकदमा चला। जानिये क्या है मामला ललितपुर के सत्र न्यायाधीश ने 13 अक्टूबर 1988 को दोनों आरोपियों को हत्या के आरोप से बरी करते हुए भी धारा 376 (बलात्कार) के तहत तीन साल कठोर कारावास और 250-250 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि चिकित्सकीय जांच (एक्स-रे रिपोर्ट सहित) में पीड़िता की उम्र 16 से 18 वर्ष के बीच आंकी गई थी, जबकि ट्रायल कोर्ट ने बिना किसी सबूत के उसकी उम्र 15 वर्ष मान ली थी। अदालत ने कहा कि उस समय लागू कानून के अनुसार सहमति की उम्र 16 वर्ष थी। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि एफआईआर में शुरू में बलात्कार का कोई आरोप नहीं था और यह सिर्फ नवजात शिशु के शव की बरामदगी से जुड़ी थी। बाद में पुलिस जांच के दौरान खुद को बच्चे की मौत के मामले में फंसता देख पीड़िता और उसकी मां ने बलात्कार की कहानी गढ़ी, जबकि पीड़िता के अपने धारा 164 के बयान से यह स्पष्ट होता था कि संबंध सहमति से बने थे। इन आधारों पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए दोनों अपीलार्थियों को बरी कर दिया और जमानतदारों को उनके दायित्व से मुक्त कर दिया।
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हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी किया:ललितपुर का मामला, रेप और हत्या के केस में फंसे थे सभी आरोपी