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सिर्फ हाईवे नहीं, यूपी की तरक्की का इंजन है गंगा एक्सप्रेस-वे, कई धार्मिक स्थल होंगे कनेक्ट, तीर्थयात्रियों के लिए अब ‘सफर’ होगा सुहाना
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ओपन एयर थिएटर से लेकर बर्ड टावर तक… बलिया के ‘सुरहा ताल’ को मिला इंटरनेशनल ‘रामसर साइट’ का टैग, देखकर आप भी कहेंगे- वाह भाई वाह!


Last Updated:

Ballia, Surha Tal Ramasar Site: उत्तर प्रदेश के बलिया में स्थित जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार (सुरहा ताल) को अंतरराष्ट्रीय ‘रामसर साइट’ घोषित किया गया है. एटा और अलीगढ़ के बाद इस साल यह यूपी की तीसरी बड़ी उपलब्धि है. ईको पर्यटन विकास बोर्ड यहां ₹4.99 करोड़ की लागत से ओपन एयर थिएटर, बर्ड वाचिंग टावर और घाटों का विकास कर रहा है. पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, इस वैश्विक मान्यता से विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

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बलिया का ‘सुरहा ताल’ बना वैश्विक रामसर साइट, ₹5 करोड़ से बदलेगी सूरत

Ballia, Surha Tal Ramasar Site: उत्तर प्रदेश के ईको-टूरिज्म और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है. बलिया जिले में स्थित सुप्रसिद्ध ‘जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार’ (सुरहा ताल) को आधिकारिक तौर पर ‘रामसर साइट’ घोषित कर दिया गया है. इस वैश्विक मान्यता के मिलने से सुरहा ताल को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी, जिससे न केवल क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों की आमद बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे. इतना ही नहीं, सुरहा ताल के समीप विभिन्न पर्यटक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, ताकि यहां आने वाले आगंतुक एक यादगार अनुभव प्राप्त कर सकें.

ओपन एयर थिएटर से लेकर बर्ड वाचिंग टावर तक: ₹4.99 करोड़ का मेगा प्लान
सुरहा ताल को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए उत्तर प्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा इसके समीप स्थित मैरीटार गाँव में व्यापक विकास कार्य शुरू कर दिए गए हैं. इस पूरी परियोजना पर ₹4.99 करोड़ से अधिक की लागत आएगी. इस भारी-भरकम बजट के तहत यहां निम्नलिखित अत्याधुनिक जन-सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है:

  • विशाल ओपन एयर थिएटर और मल्टीपर्पज हॉल
  • आकर्षक पाथवे, हॉर्टिकल्चर (बागवानी) और बेंच
  • बच्चों के लिए विशेष चिल्ड्रेन प्ले एरिया
  • सुंदर घाटों का विकास और साइनेज (सूचना पट्ट)
  • पक्षियों को निहारने के लिए बर्ड वाचिंग टावर
  • पर्यटकों की जानकारी के लिए इंटरप्रिटेशन गैलरी और कियोस्क

विदेशी और प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा बसेरा
सुरहा ताल आर्द्रभूमि अपनी समृद्ध पक्षी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है और अनेक प्रवासी तथा स्थानीय पक्षियों का महत्वपूर्ण आवास स्थल है. यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता सुरहा ताल को वैश्विक स्तर पर नई पहचान प्रदान करेगी तथा क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी.

फरवरी से अब तक प्रदेश को मिलीं तीन रामसर साइट्स
इस वर्ष फरवरी से अब तक उत्तर प्रदेश की तीन आर्द्रभूमियों को रामसर साइट का दर्जा प्राप्त हुआ है. फरवरी में एटा स्थित पटना पक्षी विहार, अप्रैल में अलीगढ़ स्थित शेखा पक्षी विहार तथा अब सुरहा ताल को रामसर स्थल के रूप में अधिसूचित किया गया है.

अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती- जयवीर सिंह
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘नए रामसर स्थलों की अधिसूचना से इन क्षेत्रों में घरेलू के साथ-साथ विशेष रूप से विदेशी पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश में आर्द्रभूमियों के संरक्षण की यह पहल न केवल जैव विविधता संरक्षण को सुदृढ़ करेगी, बल्कि प्रवासी पक्षियों के संरक्षण, जल सुरक्षा, पारिस्थितिक संतुलन तथा स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी सशक्त बनाएगी. राज्य सरकार आर्द्रभूमियों के संरक्षण एवं प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है.’

वर्ष 1971 में हुई थी शुरुआत
रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमियों के संरक्षण एवं उनके सतत उपयोग के लिए स्थापित एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में हुई थी. इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों की पहचान कर उन्हें रामसर साइट के रूप में नामित करना तथा उनके संरक्षण और प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना है.

About the Author

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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