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सुभासपा प्रमुख और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर अखिलेश यादव और उनकी पार्टी के खिलाफ लगातार मोर्चा खोले हुए हैं. ओम प्रकाश राजभर सोशल मीडिया पर लगातार अखिलेश यादव के खिलाफ पोस्ट कर रहे हैं. ओम प्रकाश राजभर यूपी की सियासत में गैर यादव वाली पॉलिटिक्स की गोटी सेट कर रहे हैं.
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के खिलाफ खोल रखा है मोर्चा.
लखनऊः देश में जब भी राजनीति की बात होती है तो यूपी-बिहार की सियासत की बात किए बिना चर्चा पूरी नहीं होती है. क्योंकि दोनों ही राज्यों की राजनीति गजब की है. हालांकि हैरान करने वाली बात यह है कि दोनों ही राज्यों में बहुत सारे अंतर हैं. लेकिन दोनों की पॉलिटिक्स एक जैसी ही है. जिस तरह से बिहार में एक दल मुस्लिम-यादव के गठजोड़ के साथ चलता है तो दूसरा दल ओबीसी-पिछड़ा की राजनीति करता है. ठीक इसी तरह की राजनीति यूपी में भी होती है. अब आप सोच रहे हैं कि भला हम यहां यूपी-बिहार की सियासत की बात क्यों कर रहे हैं तो हम आपको बता दें कि इन दिनों जो उत्तर प्रदेश में हो रहा है, वह कहानी पहले बिहार में हो चुकी है.
ओम प्रकाश राजभर ने खोल रखा है यादवों के खिलाफ मोर्चा
दरअसल, योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर अखिलेश यादव और उनकी पार्टी के साथ-साथ यादवों के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. ओम प्रकाश राजभर हर रोज कई ट्वीट करते हैं, जिसमें वह यादवों के खिलाफ जमकर हमला बोलते हैं. उनके आपराधिक रिकॉर्ड के साथ-साथ उनके गैरकानूनी कार्यों को उजागर करते रहते हैं. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर ओम प्रकाश राजभर ऐसा कर क्यों रहे हैं. उनको यादव जाति से कोई दिक्कत है या फिर कुछ अलग तरह की राजनीति करना चाहते हैं.
क्यों ओम प्रकाश राजभर यादव जाति को कर रहे हैं टारगेट
आपको बता दें कि यह जगजाहिर है कि उत्तर प्रदेश में यादव समाज समाजवादी पार्टी का कट्टर समर्थक है. एक बार को अन्य जातियों के लोग इधर से उधर हो सकते हैं. लेकिन यादव जाति के लोगों का सपा से खिसकना मुमकिन नहीं है. यही वजह है कि ओम प्रकाश राजभर यादव जाति पर हमला बोलकर अन्य जातियों को साधने की कोशिश कर रहे हैं और ओम प्रकाश राजभर केवल अपने फायदे के लिए ही नहीं बल्कि बीजेपी के फायदे के लिए भी कर रहे हैं.
कैसे एक हो रही है यूपी-बिहार की सियासत की कहानी
बात करें बिहार की राजनीति का तो 1990 के दशक में लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने खुलकर एक समीकरण बनाया, जिसको नाम दिया गया एमवाई यानी कि मुस्लिम और यादव. बिहार में राजद के प्रति यादव जाति के लोगों का भी गजब का क्रेज है. लेकिन राजद के इस समीकरण को खत्म करने के लिए समता पार्टी और बाद में जदयू ने गैर यादव समीकरण को साधने का कोशिश किया, जिसका फायदा मिला. उत्तर प्रदेश में भी आजकल ऐसा ही कुछ देखने को मिल रहा है. अंतर बस इतना है कि इस अभियान का चेहरा खुद बीजेपी के सहयोगी ओम प्रकाश राजभर हैं.
कैसे बिहार में गढ़ी गई गैर यादव वाली पॉलिटिक्स
1990 के दशक में लालू प्रसाद यादव की राजनीति सामाजिक न्याय पर टिकी थी. लेकिन धीरे-धीरे यह धारणा बनने लगी कि सत्ता और प्रशासनिक हिस्सेदारी में सबसे अधिक लाभ यादव जाति के लोगों को मिला और अन्य जातियां पीछे रह गईं. यूपी में भी जब सपा की सरकार थी, तब भी अखिलेश यादव पर यही आरोप लगे थे. हाल ही में एक पोस्टर भी लगाया गया था, जिसमें अखिलेश यादव पर आरोप लगा था यादववाद करने का. बिहार में इसी धारणा को समता पार्टी ने अपना हथियार बनाया और पूरे बिहार में यह संदेस दिया कि यादवों का वर्चस्व खत्म किए बिना बाकी पिछड़ी जातियों को उनका हिस्सा नहीं मिलेगा. अब इस रणनीति का फायदा यह हुआ कि कुर्मी, कुशवाहा, निषाद, नोनिया, तेली, कुम्हार, मल्लाह जैसी कई जातियां लालू के खिलाफ एक नए सामाजिक गठबंधन में जुड़ती चली गईं. बाद में यह गठबंधन नीतीश कुमार की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बना.
ओम प्रकाश राजभर सपा के खिलाफ सेट कर रहे हैं गोटी
बता दें कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का सबसे मजबूत सामाजिक आधार यादव और मुस्लिम वोटर माने जाते हैं. हालांकि सपा यह दावा करती रही है कि वह पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यकों की राजनीति कर रही है. लेकिन बीजेपी और उसके सहयोगी इस दावे को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें ओम प्रकाश राजभर अहम भूमिका निभा रहे हैं. ओम प्रकाश राजभर लगातार यह मैसेज देने की कोशिश कर रहे हैं कि सपा की राजनीति में यादवों का दबदबा है.
बीजेपी को इससे क्या फायदा
उत्तर प्रदेश में 2014 के बाद बीजेपी ने जिस सोशल इंजीनियरिंग पर सबसे ज्यादा काम किया, उसका आधार भी यही था कि गैर यादव ओीसी और गैर जाटव दलितों को अपने साथ जोड़ा जाए. बीजेपी जानती है कि यादव वोट का बड़ा हिस्सा सपा के साथ है. इसलिए उसकी रणनीति यादव वोट में सेंध लगाने की जगह बाकी पिछड़ी जातियों को अपने साथ बनाए रखना है. ऐसे में ओम प्रकाश राजभर जैसे सहयोगी दल वही संदेश दे रहे हैं, जिसे बीजेपी सीधे कहने से बच रही है.
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Prashant Rai am currently working as Chief Sub Editor at News18 Hindi Digital, where he lead the creation of hyper-local news stories focusing on politics, crime, and viral developments that directly impact loc…और पढ़ें