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Animal Husbandry : पशुपालकों के सामने गिरता दूध उत्पादन हमेशा से मुसीबत खड़ी करता आया है. कई बार सारे जतन करने के बाद भी इस समस्या का कोई समाधान नहीं मिलता, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. पशु विशेषज्ञ का कहना है कि दूध बढ़ाने के लिए महंगा चारा खिलाने की जरूरत नहीं है. लोकल 18 से गोंडा के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश तिवारी कहते हैं कि किसान अगर सही डाइट और उचित देखभाल करें तो कम खर्च में दूध उत्पादन बढ़ा सकते हैं.
गोंडा. पशुपालन किसानों की आमदनी बढ़ाने का एक अच्छा जरिया है. अक्सर कई पशुपालक इस बात से परेशान रहते हैं कि उनके पशु कम दूध दे रहे हैं. विशेषज्ञ का कहना है कि दूध बढ़ाने के लिए महंगा चारा खिलाने की जरूरत नहीं है, बल्कि पशुओं को संतुलित और पौष्टिक आहार देना जरूरी है. लोकल 18 से बातचीत में गोंडा के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी कहते हैं कि दूध देने वाले पशुओं के आहार में हरा चारा, सूखा चारा और संतुलित दाना शामिल होना चाहिए. हरा चारा पशुओं को जरूरी पोषक तत्व देता है, जबकि सूखा चारा उनके पाचन तंत्र को सही रखता है. दाना पशुओं को ऊर्जा प्रदान करता है, जिससे दूध उत्पादन में सुधार होता है.
मिनरल मिक्सचर क्यों इतना जरूरी?
डॉ. राकेश के मुताबिक, पशुओं को हमेशा साफ और ताजा पानी देना चाहिए. पानी की कमी होने पर पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों पर असर पड़ता है. गर्मी के मौसम में विशेष रूप से पानी का ध्यान रखना जरूरी है. पशुओं को खनिज मिश्रण (मिनरल मिक्सचर) और नमक भी नियमित रूप से देना चाहिए. इससे शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं होती और पशु स्वस्थ रहते हैं. स्वस्थ पशु ही बेहतर दूध उत्पादन कर पाते हैं.
डॉ. राकेश तिवारी का कहना है कि समय पर टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य जांच भी जरूरी है. यदि पशु किसी बीमारी से ग्रसित होगा तो उसका दूध उत्पादन कम हो सकता है. इसलिए पशुओं की देखभाल और संतुलित आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए.
हरे चारे में क्या-क्या दें?
डॉ. राकेश बताते हैं कि हरे चारे में नेपियर घास, चारी, बरसीम, मक्का को शामिल करना चाहिए. इसमें भरपूर पोषक तत्व पाया जाता है, जो आपके दुधारू पशुओं के लिए काफी है. सूखे चारे में गेहूं का भूसा, धान की भूसी और पौष्टिक आहार के रूप में दाने को शामिल करना चाहिए. दाने में आप पिसा हुआ दान दे सकते हैं. 60% सूखा चारा और 40% दाना व हरा चारा मिलकर डाइट में शामिल करें. ऐसा करने से दूध उत्पादन में बढ़ोतरी होगी. डॉ. राकेश बताते हैं कि किसान अगर सही डाइट और उचित देखभाल करें तो कम खर्च में अच्छा दूध उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. इससे पशुपालकों की आय बढ़ेगी और पशु भी लंबे समय तक स्वस्थ रहेंगे.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें