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Animal husbandry : मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के तहत पशुपालकों को 10 स्वदेशी उन्नत नस्ल की गायों की डेयरी स्थापित करने के लिए 11.80 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा. इच्छुक आवेदकों को पशु विभाग की साइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. चित्रकूट के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी प्रमोद कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि 10 गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने की कुल अनुमानित लागत 23.60 लाख रुपये तय की गई है. इसका आधा सरकार देगी. आवेदक के पास कम से कम एक एकड़ भूमि होना जरूरी है.
चित्रकूट. बुंदेलखंड के चित्रकूट जिले में पशुपालन को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना शुरू की है. इस योजना के तहत जिले के इच्छुक पशुपालकों को 10 स्वदेशी उन्नत नस्ल की गायों की डेयरी स्थापित करने के लिए 11.80 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा. यदि आप भी डेयरी व्यवसाय शुरू करने की सोच रहे हैं तो यह योजना आपके लिए बेहतर साबित हो सकती है. योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक आवेदकों को पशु विभाग की साइट में ऑनलाइन आवेदन करना होगा.
क्या हैं शर्तें
चित्रकूट के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी प्रमोद कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि 10 गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने की कुल अनुमानित लागत 23.60 लाख रुपये तय की गई है. इस लागत का 50 प्रतिशत यानी 11.80 लाख रुपये लाभार्थी को स्वयं निवेश करना होगा, जबकि शेष 11.80 लाख रुपये सरकार अनुदान के रूप में देगी. योजना का लाभ लेने के लिए कुछ आवश्यक शर्तें भी निर्धारित की गई हैं. आवेदक के पास कम से कम एक एकड़ भूमि होना जरूरी है. इसमें लगभग 0.20 एकड़ क्षेत्र में डेयरी शेड और अन्य आवश्यक निर्माण कार्य किया जाएगा, जबकि 0.10 एकड़ भूमि पर हरा चारा उत्पादन या चारागाह विकसित करना होगा, जिससे पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था हो सके.
इन नस्लों का होना जरूरी
इस योजना के अंतर्गत केवल गिर, साहीवाल और थारपारकर जैसी स्वदेशी उन्नत नस्ल की गायों को ही शामिल किया गया है. इन गायों की खरीद उनके मूल प्रजनन क्षेत्रों से कराई जाएगी, ताकि लाभार्थियों को अच्छी गुणवत्ता वाले पशु मिल सकें और दूध उत्पादन भी अधिक हो. इसके अलावा विभाग की ओर से एक अन्य योजना भी संचालित की जा रही है, जिसमें दो गायों को पालने के लिए पशुपालकों को 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा. इस योजना के तहत लाभार्थी के पास पशुओं को रखने के लिए उचित स्थान, चारा काटने की मशीन और पशुपालन की आवश्यक व्यवस्थाएं होना अनिवार्य है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें