उत्तर प्रदेश की सियासत में बयानों के तीर एक बार फिर तेज हो गए हैं. सुभासपा अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के उस दावे पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘सपा के दो दर्जन सांसद उनके संपर्क में हैं’, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और अंबेडकरनगर से सांसद लालजी वर्मा ने करारा पलटवार किया है. लालजी वर्मा ने राजभर को आड़े हाथों लेते हुए न सिर्फ उनके दावों को हवा में उड़ा दिया, बल्कि उन्हें ‘गालीबाज’ तक कह डाला.
ओपी राजभर के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सपा सांसद लालजी वर्मा ने कहा कि इस तरह के बयान पूरी तरह मनगढ़ंत और बेबुनियाद हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “ऐसे लोगों को सीरियसली नहीं लेना चाहिए जो गालीबाज हैं, जिन्हें अपने पद और प्रतिष्ठा का रत्ती भर भी ख्याल नहीं है. सपा के सभी 37 लोकसभा सांसद पूरी तरह से एकजुट हैं और चट्टान की तरह अखिलेश यादव जी के साथ खड़े हैं.”
वर्मा ने आगे कहा कि सपा के सांसद लोकतंत्र और संविधान को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि भाजपा और उसके सहयोगी दल संविधान को समाप्त करने की साजिश रच रहे हैं.
2027 में 300 पार, फिर मुख्यमंत्री बनेंगे अखिलेश
योगी सरकार पर निशाना साधते हुए लालजी वर्मा ने प्रदेश की कानून व्यवस्था, रोजगार और आरक्षण के मुद्दे पर घेरा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार इस वक्त चरम पर है. नौजवानों को रोजगार नहीं मिल रहा है और पिछड़ों-दलितों के आरक्षण को हड़पने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि लोकसभा चुनाव में जनता ने भाजपा के अहंकार को तोड़कर करारा जवाब दिया है. 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता की यह एकजुटता और मजबूत होगी.सपा और INDIA गठबंधन 300 से अधिक सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत की सरकार बनाएगा. अखिलेश यादव एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान संभालेंगे.
राम मंदिर ‘चंदा चोरी’ पर SIT जांच नाकाफी, सिटिंग जज से जांच की मांग
अयोध्या के राम मंदिर निर्माण में कथित वित्तीय अनियमितताओं और ‘चंदा चोरी’ के आरोपों पर लालजी वर्मा ने गहरी चिंता और दुख व्यक्त किया. उन्होंने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा, “जहाँ आस्था और नैतिकता की बात हो, जहाँ मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का पावन दरबार हो, वहाँ लोगों की श्रद्धा और भक्ति से इकट्ठा किए गए धन के साथ खिलवाड़ होना बेहद निंदनीय है.”
सपा महासचिव ने साफ किया कि इस गंभीर मामले में सिर्फ SIT (विशेष जांच दल) की जांच से काम नहीं चलने वाला. उन्होंने मांग की कि हाई कोर्ट के एक सिटिंग जज (वर्तमान न्यायाधीश) की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र कमेटी बनाई जाए, जिसकी देखरेख में इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो ताकि चंदे के नाम पर हेरफेर करने वाले असली दोषियों का चेहरा बेनकाब हो सके.