Last Updated:
Saharanpur News: आम के पेड़ को तैयार करने का सभी किसान अलग-अलग तरीका अपनाते हैं और आम के पेड़ से तैयार करने के लिए दो तरह की टेक्निक्स का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. कुछ किसान आम की गुठली से आम के पेड़ तैयार करते हैं तो कुछ किसान आम के पेड़ों पर ग्राफ्टिंग के माध्यम से नए पेड़ तैयार करते हैं.
सहारनपुर: आम का सीजन शुरू हो चुका है और आम के सीजन में ही कुछ किसान आम का पेड़ कलम और गुठली से तैयार करते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि आम के सबसे अच्छे पेड़ कौन से महीने में तैयार किए जाते हैं और उनको तैयार करने की क्या कुछ विधि है. आज इस खबर में हम यही जानेंगे कि कौन से महीने में आम के स्वस्थ पेड़ तैयार किया जा सकते हैं.
आम के पेड़ को तैयार करने का सभी किसान अलग-अलग तरीका अपनाते हैं और आम के पेड़ से तैयार करने के लिए दो तरह की टेक्निक्स का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. कुछ किसान आम की गुठली से आम के पेड़ तैयार करते हैं तो कुछ किसान आम के पेड़ों पर ग्राफ्टिंग के माध्यम से नए पेड़ तैयार करते हैं. लेकिन ज्यादातर ग्राफ्टिंग वाले पेड़ अच्छा फल देते हैं. आज हम जानेंगे कौन से पौधों पर ग्राफ्टिंग करने से आम के अच्छे पेड़ तैयार होते हैं.
रूट सेक्शन मजबूत
आम के पौधे तैयार करने के लिए सबसे पहले आम के पौधे का चयन करना बहुत जरूरी होता है. जो आम का बीजू पौधा होता है, वह आम के पेड़ तैयार करने के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है, क्योंकि उसके रूट सेक्शन मजबूत होते हैं. जहां से कलम तैयार की जा सकती है, वहां पर कैसे कटिंग करनी है, कटिंग करने के बाद किस खाद का इस्तेमाल करना है और कितने दिन बाद वह कलम तैयार हो जाएगी और उस कलम को कटिंग करने के बाद जमीन में लगाना है और जमीन में लगाने के बाद उसमें किन पोषक तत्वों का इस्तेमाल करना है, जिससे कि वह लगाने के कुछ साल बाद अच्छा फल देना शुरू करें, उसको लेकर पूरी जानकारी कृषि एक्सपर्ट डॉक्टर आई.के कुशवाहा ने दिया है.
बिना बीमारी के देंगे अच्छा फल
कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी और प्रोफेसर डॉक्टर आई.के कुशवाहा ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि आम के पौधे से कलम तैयार करने और उससे पौध तैयार करने के लिए जून/जुलाई का महीना सबसे बेस्ट होता है. ऐसे पौधों को तैयार करने के लिए आम की गुठली या फिर कुछ पौधों का चयन करना होता है, जिसमें बीजू पौधे सबसे अच्छे रहते है, क्योंकि इनका रूट सेक्शन बहुत मजबूत होता है और वहीं से पौधे की क्वालिटी शुरू होती है.
2 से 3 साल तक रखनी होती है निगरानी
अगर किसान ऐसे बीजू पौधों को लगा लेता है और जैसे ही वह ढाई से 3 फीट के हो जाते हैं, उसमें रूट निकलने लगती हैं और उसके बाद उसमें साइन लगाए जाते हैं. रूट सेक्शन से साइन का चयन करना बहुत ही मुश्किल टास्क होता है. देखा यह जाता है कि पौधे का चयन करने के लिए 2 से 3 साल उस पौधे की निगरानी करनी पड़ती है, जिससे देखा जाता है कि उसमें कोई बीमारी तो नही है, उसपर आने वाला फल छोटे आकार का तो नहीं है, इसलिए ऐसे पौधे का चयन किया जाता है, जिसके गुण अच्छे हो.
कलमों के बीच नहीं होना चाहिए गैप
उन्होंने आगे बताया कि उसके बाद उस पौधे में साइन बनाए जाते हैं और उसकी कटिंग लेकर उस बीजू पौधे के ऊपर (ग्राफ्टिंग) लगा दिया जाता है. उस पौधे की ग्राफ्टिंग करते वक्त दोनों कलमों के बीच में गैप नहीं होना चाहिए. उस जॉइंट को अच्छे तरीके से एयर टाइट करते हुए बांध देना चाहिए, जिसमें अच्छी पॉलिथीन का इस्तेमाल करना चाहिए. उस जॉइंट की नमी बाहर नहीं निकालनी चाहिए.
जब उसके अंदर नामी रहेगी, तब उसके अंदर हिट बनेगी, वहां से रूट सेक्शन निकलेगा. इस तरीके से करेंगे तो अच्छे पेड़ तैयार होंगे और जब कलम सरवाइव करती है, उस पर जब पत्तियां आना शुरू हो जाती है. फिर उसके रूट सेक्शन वाली पानी को हटाकर वहां से कटिंग करके उसको जमीन में लगा देते हैं और फिर उसमें खाद, पानी, माइक्रोन्यूट्रिएंट, कीटनाशी और फफूंदी नाशी रसायन का छिड़काव करते है.
About the Author
आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.