यहां पहले भी कई लोग घायल हो चुके हैं, जबकि एक दिन पहले ही इसी नाले में गिरकर एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है। हादसे के बाद उस जगह को अस्थायी रूप से घेर दिया गया है। इसी जगह पर गोड़धोईया नाला निर्माण भी चल रहा है। आगे कुछ दूरी पर जाने पर सड़क से सटा यह नाला पूरी तरह खुला पड़ा है।
कई स्थानों पर लोग मजबूरी में लकड़ी, पटरी का रास्ता बनाकर आते-जाते हैं। नाले के किनारे दुकानें भी हैं। एक निजी अस्पताल भी है जहां मरीजों और तीमारदारों का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में जरा सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
दुकानदार पप्पू ने बताया कि नाले की गहराई काफी अधिक है और सड़क से इसकी दूरी भी बहुत कम है। रात के समय या बारिश में स्थिति और खतरनाक हो जाती है। दुकानदार जुगनू ने बताया कि सड़क की ऊंचाई नाले से अधिक है।
बाइक और साइकिल सवारों को हमेशा दुर्घटना का डर बना रहता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए चलना और भी जोखिम भरा है। नाला तो बन गया लेकिन स्लैब न लगने और सुरक्षा इंतजाम न होने से लोगों की जान को खतरा है।



