आगरा में फर्जी जीएसटी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। लोहामंडी थाना पुलिस, साइबर सेल और काउंटर इंटेलिजेंस की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया गया है, जिसने बोगस फर्मों के जरिए करीब 100 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग कर सरकार को करोड़ों रुपये के जीएसटी राजस्व का नुकसान पहुंचाया। इस हाईप्रोफाइल कार्रवाई में पुलिस ने तीन शातिर आरोपियों अमन डंग, सौरभ सिंह और 68 वर्षीय राम अवतार शर्मा को गिरफ्तार किया है। एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह ने बताया कि राज्यकर अधिकारी द्वारा दिसंबर 2025 में एसके संस फर्म पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसकी विवेचना के दौरान तीनों लोगों को गिरफ्तार किया गया। सौरभ सिंह ने फर्जी फर्म बनवाई गई। अकाउंटेंट अमन डंग फर्जी बिल तैयार करता था।
गिरफ्तार 68 वर्षीय राम अवतार शर्मा गिरोह में फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। उसकी मदद से कई कंपनियों को कागजों पर खड़ा किया गया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज, मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल डाटा बरामद किया है। साइबर सेल अब इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही है, जिससे नेटवर्क के अन्य सदस्यों और लाभार्थियों तक पहुंचा जा सके।
पुलिस का दावा है कि यह गिरोह लंबे समय से कई राज्यों में सक्रिय था और सुनियोजित तरीके से फर्जी कंपनियां तैयार कर टैक्स चोरी का नेटवर्क संचालित कर रहा था। गिरोह बिना किसी वास्तविक माल की खरीद-फरोख्त के केवल कागजों पर कारोबार दिखाता था। आरोपी फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार कर अलग-अलग फर्मों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का अवैध लाभ दिलाते थे। इससे संबंधित कारोबारी टैक्स बचाने में सफल हो जाते थे, जबकि सरकार को भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ता था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह का पूरा नेटवर्क डिजिटल दस्तावेजों और फर्जी पहचान पत्रों के सहारे संचालित होता था। आरोपी नकली आधार कार्ड, पैन कार्ड, रेंट एग्रीमेंट और अन्य कूटरचित दस्तावेज तैयार कर बोगस फर्में रजिस्टर कराते थे। बाद में इन फर्मों को दूसरे राज्यों के कारोबारियों को बेच दिया जाता था, ताकि फर्जी बिलिंग का सिलसिला जारी रखा जा सके।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के साथ दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में हो सकता है। पुलिस अब उन कारोबारियों और फर्मों की भी जांच कर रही है, जिन्होंने इन फर्जी कंपनियों के जरिए आईटीसी का लाभ लिया। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस पूरे सिंडिकेट में कई और लोग शामिल हो सकते हैं, जो पर्दे के पीछे रहकर टैक्स चोरी के इस खेल को संचालित कर रहे थे। एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में लगभग 100 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग का मामला सामने आया है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और उनसे मिली जानकारी के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
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फर्जी बिल बनाकर टैक्स चोरी करने वाले तीन अरेस्ट:आगरा में 100 करोड़ रुपए के फर्जी बिलिंग पकड़ी, कई राज्यों में फैला है नेटवर्क