कैमरों के जरिए पुलिस लगातार निगरानी करती है, मगर करोड़ों रुपये का चढ़ावा आरोपी उन्हीं कैमरों को धता बताते हुए पार कर ले गए। यही नहीं, वे मंदिर परिसर के बाहर भी निकल गए, लेकिन पुलिस को इसकी जानकारी नहीं लगी। क्योंकि यदि पुलिस को इसकी भनक लगती तो आरोपियों को उसी समय पकड़ लिया जाता।
ये भी रही बड़ी वजह
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मंदिर की सुरक्षा प्राथमिकता रहती है। किसी को अंदाजा नहीं था कि भीतर से ही कोई कर्मी इस तरह का हेरफेर करेगा। इसलिए उस व्यवस्था की निगरानी उतनी गहनता से नहीं की जाती थी। परिसर के भीतर और बाहर सुरक्षा को लेकर ज्यादा सक्रियता रहती थी। कैमरों का एक्सेस ट्रस्ट के पास भी है, जबकि गणना प्रक्रिया में पुलिस की कोई भूमिका नहीं रहती थी। इसी वजह से पुलिस का ध्यान इस ओर नहीं गया। हालांकि कहीं न कहीं चूक जरूर हुई है।
मंदिर की सुरक्षा के लिए पूरी सक्रियता बरती जाती है। कैमरों का एक्सेस पुलिस के पास है, जिससे निगरानी की जाती है। इसके लिए 24 घंटे पुलिस टीम तैनात रहती है। – बलरामाचारी दुबे, एएसपी सुरक्षा, राम मंदिर
बड़े लोगों के करीबी हैं कर्मी, इसलिए भी पुलिस ने शक नहीं किया
मंदिर परिसर में कार्यरत कई कर्मचारी पदाधिकारियों के रिश्तेदार, परिचित या उनके परिचितों के परिचित बताए जाते हैं। जिसे मौका मिला, उसने अपने लोगों की भर्ती करवा दी। मंदिर परिसर का कर्मचारी होने के कारण पुलिसकर्मी भी उन्हें आने-जाने से नहीं रोकते थे। यह भी माना जाता था कि ये सभी किसी न किसी पदाधिकारी से जुड़े हुए हैं।



