राम मंदिर में चढ़ावे की अनियमितताओं और चोरी के मामले में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी ट्रस्टी या अन्य व्यक्ति पर आरोप हैं तो पुलिस को निष्पक्ष जांच और पूछताछ करने से कोई नहीं रोक सकता। मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होनी चाहिए।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा पर लगे आरोपों को लेकर आलोक कुमार ने कहा कि थोड़े समय रुकना होगा। तब इस पर विचार करना होगा। शायद ट्रस्ट ऐसा करेगा। एक इंटरव्यू में आलोक कुमार ने कहा कि राम मंदिर जैसा विशाल धार्मिक संस्थान केवल विश्वास के आधार पर नहीं चल सकता। इसके लिए मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था, स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और जवाबदेही तय करने वाली प्रणाली आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए जिन्हें प्रशासनिक कार्यों का अनुभव हो।
ये भी पढ़ें – राम मंदिर चढ़ावा चोरी में FIR, ट्रस्टी अनिल मिश्रा के दो रिश्तेदार, चंपत के ड्राइवर टिन्नू समेत आठ नामजद
ये भी पढ़ें – Ayodhya: राममंदिर चढ़ावा चोरी में सुबूतों के आधार पर बढ़ेंगे आरोपी, विवेचना के लिए गठित होगी टीम
उन्होंने कहा कि रामभक्तों द्वारा दिया गया चंदा और चढ़ावा केवल भगवान राम और मंदिर से जुड़े कार्यों पर ही खर्च होना चाहिए। आलोक कुमार ने बताया कि उन्होंने पहले भी इस मामले में मुकदमा दर्ज करने की राय दी थी, लेकिन नाम सामने आने और तथ्यों के स्पष्ट होने के बाद एसआईटी की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था। वहीं, उन्होंने कहा था कि मामले की जानकारी हुई थी कि एसआईटी जांच में कुछ लोगों के नाम सामने आए हैं। उन पर केस दर्ज किया जाएगा। इस बयान के कुछ ही घंटे बाद एफआईआर दर्ज की गई।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया पर भी विहिप अध्यक्ष ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर ढोंग कर रही है। राम मंदिर आंदोलन के दौरान हुई गोलीबारी पर उसने कभी शोक व्यक्त नहीं किया। वहीं, कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के नेताओं ने भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए। ऐसे में इन दलों की वर्तमान टिप्पणियों को गंभीरता से नहीं लिया जा सकता। आलोक कुमार का यह बयान ऐसे समय आया है जब राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच और उससे जुड़े आरोप-प्रत्यारोप राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बने हुए हैं।