अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच और तेज हो गई है. सूत्रों के अनुसार इस प्रकरण की जांच के लिए गठित विशेष जांच समिति (एसआईटी) जल्द अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है. रिपोर्ट से पहले इस पूरे मामले को लेकर कई ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब का इंतजार श्रद्धालुओं से लेकर संत समाज और राजनीतिक दलों तक सभी को है.
इन सवालों के केंद्र में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी, कर्मचारी, पुलिस और विशेष रूप से चंपत राय की भूमिका है.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बीच अखिलेश यादव के चाचा का दावा- हमने दिया था चंदा था लेकिन…
यहां पढ़ें वो 10 सवाल जिनके जवाब का आज भी इंतजार
1. 27 मई के बाद तुरंत क्या कार्रवाई हुई?
2. चंपत को शिकायत करने से किसने रोका?
3. चोरी पता चलने पर चंपत ने शिकायत क्यों नहीं की?
4. आरोपियों को सबूत मिटाने के लिए 10 दिन मिले?
5. चोरी में शामिल लोग गिनती से क्यों नहीं हटाए गए?
6. क्या ट्रस्ट में शामिल सरकारी अधिकारियों को जानकारी दी गई?
7. अयोध्या पुलिस ने इस खबर पर चुप्पी क्यों साधी?
8. पुलिस किसके इशारे पर काम करती रही?
9. विपक्ष मामला नहीं उठाता तो क्या पता चलता?
10. क्या मामला दबाने की कोशिश लगातार हुई?
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों से घिरे चंपत राय का पहला बयान- कलंक लेकर अयोध्या से नहीं जाऊंगा
संत समाज ने उठाए सवाल
राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर संत समाज का असंतोष भी सामने आने लगा है. स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने बातचीत में आरोप लगाया कि चढ़ावे के दुरुपयोग के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं. उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर भी राम मंदिर के नाम पर अवैध रूप से चंदा और सोना जुटाने के आरोप लगाए.
वहीं अयोध्या के संत करपात्री महाराज ने कहा कि अब तक की एसआईटी जांच और कार्रवाई से वे संतुष्ट नहीं हैं. उनका आरोप है कि एफआईआर केवल छोटे स्तर के लोगों तक सीमित रही, जबकि बड़े जिम्मेदार लोगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
रामगोपाल यादव का हमला
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने कहा कि मंदिर चढ़ावा मामले में केवल चंपत राय ही नहीं, बल्कि कई बड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं. उन्होंने दावा किया कि देश के कई बड़े मंदिरों में सोना-चांदी और नकदी के प्रबंधन की पूरी व्यवस्था रिकॉर्ड के साथ होती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं दिखा.
रामगोपाल यादव ने यह भी कहा कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान उनके घर भी चंदा मांगने लोग आए थे और उन्होंने भी चंदा दिया था, लेकिन उसका कोई हिसाब-किताब नहीं मिला. उन्होंने नारा देते हुए कहा, ‘चंदा चोरी, सीना जोरी नहीं चलेगी.’
श्रद्धालुओं की आस्था बरकरार
राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच अयोध्या के संत स्वामी वरुणादित्य का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम का श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई असर नहीं पड़ा है. उनके मुताबिक, बड़ी संख्या में श्रद्धालु लगातार दर्शन के लिए आ रहे हैं और अब चढ़ावे की गणना पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी तरीके से की जा रही है.
देवकीनंदन ठाकुर बोले- कष्ट हुआ है…
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने राम मंदिर चंदे के विवाद पर कहा, ‘मैं अभी इस विषय पर क्या बोलूं? ये तो आप सभी जानते हैं कि अगर ऐसा कुछ हुआ है, तो ये जांच का विषय है और चल रही है. लेकिन अगर ये हुआ है, तो इससे करोड़ों हिंदू, सनातनी जो भगवान राम में अपनी आस्था रखते हैं, उनको कष्ट हुआ है.’