उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद के बिसवां कस्बे में उस समय मातम छा गया, जब लखनऊ के भीषण अग्निकांड में जान गंवाने वाले आदित्य श्रीवास्तव का शव उनके पैतृक निवास पहुंचा. शव के पहुंचते ही परिवार के साथ-साथ पूरे मोहल्ले में कोहराम मच गया. हर आंख नम थी और हर जुबान पर एक ही सवाल था कि आखिर ऐसी लापरवाही की कीमत मासूम जिंदगियों को कब तक चुकानी पड़ेगी.
अग्निकांड में युवक की मौत पर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
बिसवां कस्बे के कैथीटोला निवासी आदित्य श्रीवास्तव लखनऊ में उस बिल्डिंग में नौकरी करते थे, जहां भीषण आग लगने की घटना हुई थी. हादसे में उनकी दर्दनाक मौत हो गई. आदित्य अधिवक्ता आलोक श्रीवास्तव और शिक्षामित्र माता के बेटे थे. परिवार के चार भाई-बहनों में वह दूसरे नंबर पर थे. उनके असमय निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.
शव के घर पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. मां बार-बार बेटे को पुकारती रहीं, जबकि पिता और अन्य परिजन खुद को संभाल नहीं पा रहे थे. पूरे कस्बे के लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े. हर कोई आदित्य के मिलनसार स्वभाव और उज्ज्वल भविष्य को याद कर भावुक नजर आया.
मृतक के मामा-चाचा ने हादसे को लेकर उठाए गंभीर सवाल
इस दौरान आदित्य के मामा और चाचा ने हादसे को लेकर गंभीर सवाल उठाए. उनका कहना था कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि बड़ी लापरवाही का नतीजा है. आदित्य के मामा ने सवाल करते हुए कहा कि अगर बिल्डिंग में इतनी भीषण आग लगी थी तो केवल छात्र ही क्यों फंसे? वहां मौजूद स्टाफ और प्रबंधन के लोग सुरक्षित कैसे निकल गए? उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.
परिजनों ने भी सरकार से साफ शब्दों में कहा कि उन्हें केवल आर्थिक सहायता या मुआवजा नहीं चाहिए, बल्कि इस हादसे के जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए. उनका कहना है कि किसी भी परिवार के लिए उसके बच्चे की जान की कीमत कोई अनुदान नहीं हो सकता. परिवार ने न्याय की मांग करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थान संचालकों की जवाबदेही तय होनी चाहिए.
लखनऊ भीषण अग्निकांड में कुल 15 लोगों की मौत
गौरतलब है कि लखनऊ में हुए इस भीषण अग्निकांड में कुल 15 लोगों की मौत हुई है. इस हादसे ने सुरक्षा व्यवस्थाओं और प्रशासनिक निगरानी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. घटना के बाद प्रदेशभर में शोक और आक्रोश का माहौल है.
आदित्य श्रीवास्तव की मौत ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक लापरवाही के कारण लोगों की जान जाती रहेगी. कब सिस्टम पूरी तरह जागेगा और कब ऐसे हादसों पर स्थायी विराम लगेगा. फिलहाल बिसवां का पूरा इलाका शोक में डूबा है और हर कोई आदित्य को नम आंखों से अंतिम विदाई दे रहा है.
लखनऊ अग्निकांड: ‘पापा मुझे बचा लीजिए…’, बेटे की चीखें सुन तुरंत अलीगंज भागे पिता, सबकुछ हो गया तबाह