लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सीएम योगी ने बुधवार को अपने सरकारी आवास पर लखनऊ मण्डल के जनप्रतिनिधियों के साथ लोक निर्माण विभाग (PWD) की वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना को लेकर अहम बैठक की. बैठक में लखनऊ, हरदोई, रायबरेली, उन्नाव, सीतापुर और लखीमपुर खीरी के जनप्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों की प्रमुख विकास परियोजनाओं, अधोसंरचना संबंधी जरूरतों और जनअपेक्षाओं को मुख्यमंत्री के सामने रखा.
बैठक में जानकारी दी गई कि लखनऊ मण्डल के विभिन्न विकासखंडों से करीब 41,229 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले 4,204 विकास प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन प्रस्तावों की प्राथमिकता तय कर जल्द से जल्द कार्ययोजना शासन को भेजी जाए, ताकि जून माह के अंत तक इन्हें मंजूरी देकर काम शुरू कराया जा सके.
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र की जरूरतों की सबसे बेहतर समझ होती है. इसलिए उनके सुझावों और प्राथमिकताओं को गंभीरता से लेते हुए विकास परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाए. उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य तय समयसीमा के भीतर और पूरी गुणवत्ता के साथ पूरे होने चाहिए.
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने मण्डल में चल रही निर्माणाधीन परियोजनाओं की भी समीक्षा की. अधिकारियों ने बताया कि अब तक 3,238 विकास कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि बाकी परियोजनाएं निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं. मुख्यमंत्री ने लंबित कार्यों को जल्द पूरा कराने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों के काम में देरी हो रही है या जिन्होंने अब तक कार्य शुरू नहीं किए हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.
सीएम योगी ने लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्टेट हाईवे, बड़े और छोटे पुल, आरओबी-आरयूबी, धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाली सड़कें, फ्लाईओवर निर्माण, सड़क सुरक्षा और ब्लैक स्पॉट सुधार जैसे प्रस्तावों पर तेजी से काम किया जाए. साथ ही जिला मुख्यालयों को फोरलेन सड़कों से जोड़ने, चीनी मिलों तक बेहतर सड़क संपर्क और सिंगल कनेक्टिविटी वाली सड़कों के निर्माण को भी प्राथमिकता दी जाए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास परियोजनाओं के दौरान प्रभावित लोगों का उचित पुनर्वास किया जाए और उन्हें नियमानुसार मुआवजा भी दिया जाए. उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि परियोजनाओं का भूमिपूजन और शिलान्यास स्थानीय जनप्रतिनिधियों के कर-कमलों से कराया जाए.
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी. सरकार जनप्रतिनिधियों के सुझावों और जनता की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश के समग्र विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है.