नीट 2026 पेपर लीक मामले में कांग्रेस द्वारा आज कई शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गयी है. इसी कड़ी में देहरादून में कांग्रेस नेता और छतीसगढ़ से राज्यसभा सांसद रंजीत रंजन देहरादून पहुंची. उन्होंने लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधा है. प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा जैसी बुनियादी ज़रूरत की रक्षा करना सरकार का दायित्व है, लेकिन मौजूदा हालात में शिक्षा व्यवस्था अब शिक्षा से ज़्यादा वसूली का माध्यम बन गई है.
कांग्रेस सांसद ने इसके लिए सीधे-सीधे मोदी सरकार की नीतियों और शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को बताते हुए उनके इस्तीफे की मांग की. उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं है.
पहाड़ की जवानी का सपना चूर-चूर हो रहा है
रंजीत रंजन ने उत्तराखंड के युवाओं की पीड़ा को सामने रखते हुए कहा कि यहाँ का अधिकांश युवा या तो सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करता है, या फिर मेहनत से पढ़कर सरकारी नौकरी हासिल करता है और प्रदेश की सेवा करता है. उन्होंने कहा कि बार-बार हो रहे पेपर लीक के कारण इन्हीं युवाओं के सपने और बरसों की मेहनत मिट्टी में मिल जाती है. उन्होंने उत्तराखंड की मशहूर कहावत ‘पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी पहाड़ के काम आती है’ का ज़िक्र करते हुए कहा कि जिस रफ़्तार से राज्य में परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं, उस लिहाज़ से यह कहावत अब सही नहीं ठहरती, क्योंकि पहाड़ की जवानी को ही सबसे ज़्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है.
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10 साल में 89 पेपर लीक”सरकार पर सवाल
रंजीत रंजन ने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में देश भर में करीब 89 परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं, जो शिक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है. कांग्रेस के ही शीर्ष नेतृत्व ने हाल में सोशल मीडिया पर यह दावा दोहराते हुए कहा था कि इन 10 वर्षों में 89 पेपर लीक के अलावा 48 परीक्षाएं दोबारा करानी पड़ी हैं, और अब परीक्षा प्रणाली ‘नीलामी’ जैसी बन गई है.
रंजीत रंजन ने यह भी कहा कि गुजरात में पिछले ग्यारह वर्षों में ग्यारह पेपर लीक के मामले खुद राज्य सरकार ने स्वीकार किए हैं. उनका कहना था कि जब प्रधानमंत्री के ख़ुद के राज्य में ही इतने मामले हों, तो यह अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं कि पूरे देश में परीक्षा प्रणाली कितनी असुरक्षित हो चुकी है. उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि कड़े कानूनों के बावजूद आख़िर सरकार पेपर लीक माफिया पर लगाम लगाने में नाकाम क्यों साबित हो रही है.
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग
रंजीत रंजन ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की इस मामले में सीधी ज़िम्मेदारी है, इसके बावजूद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अब तक अपने पद से इस्तीफा नहीं दे रहे. उन्होंने कहा कि नैतिकता के आधार पर शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि कड़े कानून बनने के बावजूद नकल और पेपर लीक माफिया बेख़ौफ़ होकर अपना काम कर रहा है, जो सरकार की मंशा और इरादे पर सवाल खड़ा करता है.
यह माँग सिर्फ रंजीत रंजन तक सीमित नहीं रही. पिछले कुछ हफ्तों में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के कई अन्य नेता भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग दोहरा चुके हैं. खरगे ने तो यह तक कह दिया कि शिक्षा मंत्री “अपनी कुर्सी से चिपके हुए हैं” और लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है.
आत्महत्या के मामलों ने बढ़ाई चिंता
पेपर लीक का असर सिर्फ परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने कई छात्रों की मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाला है. उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि NEET पेपर लीक के कारण मानसिक तनाव से 12 छात्रों ने अपनी जान दे दी, लेकिन इसके बावजूद शिक्षा मंत्री ने नैतिक ज़िम्मेदारी लेकर इस्तीफा नहीं दिया. वहीं कुछ किसान और छात्र संगठनों ने यह आँकड़ा करीब 17 बताया है और कहा है कि हज़ारों छात्र इस दहशत और तनाव के कारण एंज़ायटी जैसी मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं.
इस साल मई में आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा, जिसमें 22 लाख से ज़्यादा अभ्यर्थी शामिल हुए थे, पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दी गई और बाद में दोबारा करानी पड़ी. बताया जाता है कि परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर सैकड़ों सवालों वाला एक दस्तावेज़ वायरल हो गया था, जिसे लेकर बड़े स्तर पर जाँच के आदेश दिए गए. इस घटना ने पूरे देश में परीक्षा प्रणाली की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.
विरोध सड़कों तक पहुंचा
यह मुद्दा अब सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहा है. हाल में ही देहरादून में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने उत्तराखंड सचिवालय का घेराव करने की कोशिश की थी जिसमें पुलिस से झड़प भी हुई. पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत कई वरिष्ठ नेता भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए थे. इसके अलावा युवाओं के एक स्वतंत्र डिजिटल समूह ने भी दिल्ली के जंतर-मंतर से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग को लेकर आंदोलनरत जिसे सोशल मीडिया पर भारी समर्थन मिला है.
कांग्रेस ने इसी कड़ी में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में एक देशव्यापी अभियान भी शुरू किया है. इसकी शुरुआत राजस्थान के कोटा से हुई, जहाँ राहुल गांधी ने हज़ारों छात्रों से सीधा संवाद किया और शिक्षा व्यवस्था को ‘वसूली’ का ज़रिया बताया. इसके बाद यह अभियान प्रयागराज, पटना से होते हुए दिल्ली तक पहुँचेगा. पार्टी का कहना है कि अगले लगभग चालीस दिनों में देश के 28 प्रमुख शहरों में इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किए जाएँगे, जिनमें छात्र संगठन, युवा कांग्रेस और स्थानीय कार्यकर्ता शामिल होंगे.
रंजीत रंजन ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि जब तक सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं करती और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से लेकर संसद तक उठाती रहेगी.