Last Updated:
बेशर्म, जिसे कई जगह बेहया भी कहा जाता है, एक तेजी से बढ़ने वाला झाड़ीदार पौधा है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह बहुत कम समय में घनी झाड़ी का रूप ले लेता है। इसकी शाखाएं एक-दूसरे में इस तरह उलझ जाती हैं कि खेत के चारों ओर एक प्राकृतिक दीवार तैयार हो जाती है। यही कारण है कि बड़े जानवरों के लिए खेत में प्रवेश करना कठिन हो जाता है।
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में इन दिनों लगातार आवारा जानवरों का आतंक बढ़ता जा रहा है जिस कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो रही है. ऐसे में आवारा जानवरों से फसल बचाने के लिए किसान कई प्रकार के तरीके अपनाते हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे पौधे के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे आप आसानी से खेतों में लगा देगें तो जानवर आपके खेतों में प्रवेश नहीं कर पाएंगे. यह पौधा आपको आसानी से हर जगह मिल जाएगा. खास बात यह है कि एक बार इस पौधे को लगाने के बाद यह पौधा लगातार बढ़ता रहता है. इसका नाम है बेशर्म’ (बेहया) का पौधा, जिसे खेत की मेड़ पर लगाने से प्राकृतिक सुरक्षा घेरा तैयार किया जा सकता है.

बेशर्म का पौधा बहुत तेजी से बढ़ता है और कुछ ही महीनों में घनी झाड़ी का रूप ले लेता है। इसकी शाखाएं आपस में इतनी उलझ जाती हैं कि बड़े जानवरों के लिए खेत के अंदर घुसना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि कई किसान इसे खेत की मेड़ों पर लगाकर प्राकृतिक बाड़ के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं.

इस पौधे की खास बात यह है कि इसे लगाने में ज्यादा खर्च नहीं आता. इसकी टहनियां काटकर सीधे जमीन में लगा दी जाती हैं और थोड़ी नमी मिलने पर ये आसानी से जड़ पकड़ लेती हैं. इसके बाद बहुत कम देखभाल की जरूरत पड़ती है बेशर्म की झाड़ियां खेत की सीमा तय करने के साथ-साथ मिट्टी के कटाव को भी कम करने में मदद करती हैं.
Add News18 as
Preferred Source on Google

बेशर्म की घनी झाड़ियां तैयार हो गई हैं, वहां आवारा पशुओं का प्रवेश पहले की तुलना में काफी कम हुआ है। इससे फसल की सुरक्षा बेहतर हुई है और रातभर खेत की रखवाली का बोझ भी कुछ हद तक कम हुआ है आज अधिकांश किसान लोहे की तारबाड़ कराने में सक्षम नहीं हैं क्योंकि इसकी लागत काफी अधिक होती है। एक छोटे किसान के लिए पूरे खेत की फेंसिंग कराना आर्थिक रूप से मुश्किल होता है। ऐसे में बेशर्म का पौधा कम खर्च में प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता है

बेशर्म का पौधा लगाना बेहद आसान है किसान इसकी 1 से 2 फीट लंबी स्वस्थ टहनियां लेकर खेत की मेड़ पर लगभग 2 से 3 फीट की दूरी पर लगा सकते हैं बरसात का मौसम इसकी रोपाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है क्योंकि इस समय मिट्टी में पर्याप्त नमी रहती है और पौधे जल्दी जड़ पकड़ लेते हैं .शुरुआती दिनों में हल्की सिंचाई करने से पौधे अच्छी तरह विकसित होते हैं कुछ ही महीनों में इनकी शाखाएं फैलने लगती हैं और धीरे-धीरे पूरी मेड़ घनी झाड़ी में बदल जाती है

इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बार-बार खाद या विशेष देखभाल की आवश्यकता नहीं होती। केवल समय-समय पर इसकी छंटाई कर दी जाए तो यह और अधिक घना बनता है। कटाई के दौरान निकली टहनियों का उपयोग नए पौधे तैयार करने में किया जा सकता है.यदि आसपास पहले से बेशर्म का पौधा उपलब्ध है तो किसान उसकी टहनियां लेकर मुफ्त में ही अपने खेत में लगा सकते हैं

बेशर्म का पौधा केवल सुरक्षा ही नहीं देता बल्कि पर्यावरण के लिए भी कुछ लाभ पहुंचाता है। इसकी जड़ें मिट्टी को पकड़कर रखती हैं, जिससे वर्षा के दौरान मिट्टी का कटाव कम होता है। घनी झाड़ियों के कारण खेतों के आसपास हरियाली बनी रहती है और कुछ छोटे पक्षियों तथा उपयोगी कीटों को भी आश्रय मिलता है.बेशर्म का पौधा उपयोगी है, लेकिन यह तेजी से फैलने वाला पौधा भी माना जाता है। इसलिए इसकी नियमित छंटाई करते रहना जरूरी है ताकि यह खेत के अंदर या आसपास अनियंत्रित रूप से न फैल जाए

इस पौधे की एक खास बात यह है कि इसकी तीखी दुर्गंध जानवरों को बिल्कुल पसंद नहीं आती. नीलगाय, जंगली जानवर या पालतू जानवर कोई भी इस पौधे के पास फटकता नहीं. इसे अंग्रेजी में आइटामिया (Itamia) कहते हैं. अगर किसान अपने खेत की चारों तरफ इस पौधे को लगा दें तो जानवर खेत में घुसने से बचते हैं और फसल सुरक्षित रहती है.