उत्तराखंड में भीषण गर्मी के बीच बिजली की मांग ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. पिछले दो दिनों में राज्य की बिजली खपत तेजी से बढ़कर करीब 6.5 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई है. इस उछाल से बिजलीघरों और पावर ग्रिड पर भारी दबाव पड़ रहा है, जिसके चलते कई इलाकों में ट्रिपिंग और अस्थायी कटौतियां हुई हैं.
ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जून की शुरुआत में बिजली की मांग लगभग 4.6 करोड़ यूनिट थी, जो 26 जून तक बढ़कर 6.5 करोड़ यूनिट के करीब पहुंच गई. महज दो दिनों में मांग 5.9 करोड़ से 6.5 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई, जो राज्य के लिए अब तक का उच्चतम स्तर है. राज्य पूल से 1.6 करोड़, केंद्रीय पूल से 2.1 करोड़ और अन्य स्रोतों से 1.8 करोड़ यूनिट बिजली उपलब्ध हो रही है. इसके बावजूद पीक आवर्स में सप्लाई बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है.
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ट्रिपिंग से प्रभावित इलाके
बढ़ते तापमान और ओवरलोडिंग के कारण कई जगहों पर बिजली आपूर्ति बाधित हुई. ऋषिकेश में 132 केवी ज्वालापुर बिजलीघर में करीब एक घंटे की कटौती हुई. 132 केवी पदार्था बिजलीघर में 20 मिनट और श्रीनगर के 160 एमवीए ट्रांसफार्मर पर ओवरलोडिंग के कारण एक घंटे 20 मिनट तक बिजली नहीं पहुंची. ज्वालापुर-चीला और ज्वालापुर-ऋषिकेश लाइनों में ट्रिपिंग से 16 मिनट की कटौती हुई. श्रीनगर, सिमली, सतपुली और कोटद्वार में भी 22 मिनट तक आपूर्ति प्रभावित रही.
उत्पादन चिंता का विषय
उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) का वर्तमान उत्पादन 1.6 करोड़ यूनिट पर है, जो पिछले साल 1 जुलाई को दर्ज 1.9 करोड़ यूनिट से कम है. विभाग को उम्मीद है कि बारिश शुरू होने के बाद जलस्तर बढ़ने से उत्पादन में सुधार आएगा.
यूपीसीएल का बयान
उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने किसी भी घोषित बिजली कटौती से इनकार किया है. हालांकि, बढ़ती मांग और सीमित उत्पादन के बीच बिजली व्यवस्था बनाए रखना यूपीसीएल के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. यदि तापमान में कमी नहीं आई या बारिश नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.
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