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सिर्फ हाईवे नहीं, यूपी की तरक्की का इंजन है गंगा एक्सप्रेस-वे, कई धार्मिक स्थल होंगे कनेक्ट, तीर्थयात्रियों के लिए अब ‘सफर’ होगा सुहाना
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सिर्फ हाईवे नहीं, यूपी की तरक्की का इंजन है गंगा एक्सप्रेस-वे, कई धार्मिक स्थल होंगे कनेक्ट, तीर्थयात्रियों के लिए अब ‘सफर’ होगा सुहाना
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Aaj Ka Mausam | Today Weather: अब 7 दिनों तक मौसम मचाएगा तबाही, मुंबई से लेकर हिमाचल तक खतरे की आहट, IMD ने दे दी चेतावनी


Today Weather: देश में मानसून अब अपने सबसे सक्रिय दौर में पहुंच चुका है. पहाड़ों से लेकर समुद्र तटीय इलाकों तक मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है. कहीं बादल फटने और भूस्खलन का खतरा है तो कहीं तेज आंधी और मूसलाधार बारिश लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने साफ संकेत दिया है कि अगले सात दिनों तक कई राज्यों में मौसम सामान्य नहीं रहने वाला. उत्तर भारत, मध्य भारत, पश्चिमी तट और पूर्वोत्तर में अलग-अलग वेदर सिस्टम सक्रिय हैं. यही वजह है कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और हिमालयी राज्यों के लिए लगातार चेतावनियां जारी की जा रही हैं. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समय लापरवाही छोटी गलती नहीं बल्कि बड़ा जोखिम साबित हो सकती है. खासकर नदी किनारे रहने वाले लोग, पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वाले पर्यटक और समुद्र में जाने वाले मछुआरों को अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है. आने वाले कुछ दिन मानसून की असली ताकत दिखा सकते हैं.

मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र अगले 24 से 48 घंटों में और मजबूत हो सकता है. इसके प्रभाव से उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वी भारत में भारी बारिश का दायरा और बढ़ेगा. मुंबई और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में 15 जुलाई तक लगातार बारिश के संकेत हैं. वहीं उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भूस्खलन तथा अचानक बाढ़ का खतरा बना रहेगा. मौसम विभाग ने किसानों को फसल प्रबंधन में सावधानी बरतने और मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है. कई राज्यों में 70 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. ऐसे में पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और यातायात प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है.

महाराष्ट्र में मानसून का असर सबसे ज्यादा मुंबई, पुणे, पालघर, रायगढ़ और कोंकण क्षेत्र में देखने को मिल रहा है. (AP)
  • मानसून की यह सक्रियता केवल शहरों तक सीमित नहीं है. ग्रामीण इलाकों में भी इसका असर साफ दिखाई देगा. लगातार बारिश से जहां खरीफ फसलों के लिए नमी बढ़ेगी, वहीं अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव और फसल नुकसान का खतरा भी रहेगा. मौसम विभाग के अनुसार अगले सप्ताह तक देश के अधिकांश हिस्सों में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और कई राज्यों में रुक-रुककर तेज बारिश होती रहेगी. इसलिए स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर ध्यान देना और मौसम अपडेट पर नजर रखना बेहद जरूरी है.
  • स्काईमेट और आईएमडी दोनों का मानना है कि पश्चिमी तट, हिमालयी क्षेत्र और गंगा के मैदानी इलाकों में सबसे अधिक सतर्क रहने की जरूरत है. महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा में समुद्र उफान पर रह सकता है, जबकि उत्तराखंड और हिमाचल में पहाड़ी मार्गों पर यात्रा जोखिम भरी हो सकती है. दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और बिहार में तेज बारिश के साथ आंधी का असर जनजीवन पर दिखाई देगा. कई शहरों में जलभराव, ट्रैफिक जाम और बिजली गिरने की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं. ऐसे में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है.

दिल्ली-NCR में तेज बारिश और 80 KM की आंधी का अलर्ट

राजधानी दिल्ली और एनसीआर में 9 जुलाई को मौसम पूरी तरह बदला हुआ नजर आ सकता है. जहां कल यानी 8 जुलाई को पूरी रात बारिश हुई है. वहीं आज आईएमडी ने भारी बारिश, गरज-चमक और 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है. इससे कई इलाकों में जलभराव, ट्रैफिक जाम और पेड़ गिरने की घटनाएं हो सकती हैं. अधिकतम तापमान करीब 29 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. लगातार बादल छाए रहने से उमस कम होगी, लेकिन बारिश के दौरान बिजली गिरने और तेज हवाओं से नुकसान की आशंका बनी रहेगी. लोगों को खुले मैदान, कमजोर पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी गई है.

उत्तर प्रदेश में 90 KM की रफ्तार से चल सकती है आंधी

उत्तर प्रदेश में मानसून सबसे ज्यादा सक्रिय राज्यों में शामिल रहेगा. मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, मुजफ्फरनगर, आगरा, अयोध्या, अमरोहा, बाराबंकी, प्रयागराज, रायबरेली, सीतापुर, उन्नाव, बांदा और कई अन्य जिलों में भारी बारिश के साथ 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज आंधी चलने की चेतावनी जारी की गई है. कई स्थानों पर बिजली गिरने और निचले इलाकों में जलभराव की आशंका भी है. राजधानी लखनऊ में अधिकतम तापमान 33 और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. किसानों को खेतों में बिजली कड़कने के दौरान काम नहीं करने की सलाह दी गई है.

दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है. (AP)

बिहार में तीन दिन तक बारिश और तेज हवा का असर

बिहार में 9 से 11 जुलाई तक मौसम काफी सक्रिय रहने वाला है. पटना, गोपालगंज, सारण, सिवान, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, कटिहार, अररिया, भागलपुर, मुंगेर, खगड़िया और बेगूसराय समेत कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना है. इसके साथ 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. मौसम विभाग ने नदियों के जलस्तर बढ़ने और निचले इलाकों में जलभराव की भी चेतावनी दी है. पटना में अधिकतम तापमान 32 और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. ग्रामीण इलाकों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.

झारखंड में गरज-चमक के साथ तेज बारिश का दौर

झारखंड में अगले दो दिनों तक मानसून का असर बना रहेगा. रांची, पलामू, चतरा, दुमका, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, लातेहार, धनबाद, बोकारो, देवघर और हजारीबाग समेत कई जिलों में भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है. इस दौरान 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. कई इलाकों में बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा. मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े नहीं होने की अपील की है. रांची का तापमान 24 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है.

पश्चिम बंगाल में बारिश के साथ तेज हवाओं की दस्तक

पश्चिम बंगाल में कोलकाता, बांकुड़ा, जलपाईगुड़ी, कालिम्पोंग, मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिण 24 परगना समेत कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है. 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है. दार्जिलिंग और पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बना रह सकता है, जबकि मैदानी इलाकों में जलभराव की समस्या बढ़ सकती है. कोलकाता में अधिकतम तापमान 31 और न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. प्रशासन ने मछुआरों और नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है.

राजस्थान में फिर सक्रिय होगा मानसून, कई जिलों में तेज बारिश का अलर्ट

राजस्थान में अगले दो दिनों के दौरान मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ लौटता दिखाई देगा. मौसम विभाग ने करौली, अलवर, बीकानेर, बाड़मेर, बूंदी, सीकर, झुंझुनूं, भरतपुर, धौलपुर, डूंगरपुर, जैसलमेर, कोटा, जयपुर, अजमेर और टोंक समेत कई जिलों में बारिश और तेज आंधी की चेतावनी जारी की है. इस दौरान 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. कई इलाकों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होने की संभावना है, जिससे निचले क्षेत्रों में जलभराव और ग्रामीण इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित हो सकता है. जयपुर में अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. प्रशासन ने लोगों से बिजली कड़कने के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने और अनावश्यक यात्रा नहीं करने की अपील की है.

मध्य प्रदेश में लो-प्रेशर सिस्टम बढ़ाएगा बारिश का असर

उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र राज्य के मौसम को लगातार प्रभावित कर रहा है. आईएमडी के अनुसार मुरैना, दतिया, छतरपुर, सिवनी, टीकमगढ़, मांडला, बालाघाट, रीवा, सीधी और गुना सहित कई जिलों में भारी बारिश के साथ तेज हवाओं का दौर जारी रह सकता है. 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की भी संभावना जताई गई है. भोपाल में अधिकतम तापमान करीब 30 डिग्री और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. लगातार बारिश से कई छोटे नदी-नालों का जलस्तर बढ़ सकता है. किसानों को खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करने और फसलों को जलभराव से बचाने की सलाह दी गई है.

पंजाब-हरियाणा में बारिश से मिलेगी गर्मी से राहत

  • पंजाब और हरियाणा में लंबे समय से बनी उमस और गर्मी के बाद मानसून अब राहत लेकर आ रहा है. गुरदासपुर, तरनतारन, अमृतसर, कपूरथला, लुधियाना, मोगा, पटियाला, एसएएस नगर और बठिंडा सहित कई जिलों में भारी बारिश और 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान है. हरियाणा के अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, यमुनानगर और आसपास के इलाकों में भी गरज-चमक के साथ अच्छी बारिश हो सकती है. तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी.
  • बारिश का यह दौर खरीफ की खेती के लिए फायदेमंद माना जा रहा है, लेकिन अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जलभराव की समस्या भी बढ़ सकती है. मौसम विभाग ने किसानों को उर्वरकों और कीटनाशकों का छिड़काव फिलहाल टालने की सलाह दी है. वहीं, शहरों में ट्रैफिक जाम और जलभराव की स्थिति बन सकती है. प्रशासन ने लोगों से मौसम विभाग के अलर्ट पर लगातार नजर रखने की अपील की है.

पहाड़ों में भूस्खलन और बादल फटने का बढ़ा खतरा

  • उत्तराखंड में 9 से 12 जुलाई के बीच मौसम बेहद संवेदनशील रहने वाला है. नैनीताल, हरिद्वार, ऋषिकेश, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और टिहरी गढ़वाल सहित कई जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है. 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, सड़कें बंद होने और नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका बनी हुई है. चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को मौसम अपडेट देखकर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है. देहरादून में अधिकतम तापमान 26 और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है.
  • हिमाचल प्रदेश में मानसून लगातार कहर बरपा रहा है. शिमला, कुल्लू, मंडी, बिलासपुर, कांगड़ा, सोलन, सिरमौर, किन्नौर, चंबा और ऊना में अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है. 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है. पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण सड़कें बंद हो सकती हैं और यात्रा प्रभावित हो सकती है. प्रशासन ने पहले से मशीनें तैनात कर रखी हैं ताकि किसी भी सड़क को जल्द से जल्द खोला जा सके. मनाली में अधिकतम तापमान 13 और न्यूनतम 11 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है.
  • जम्मू-कश्मीर के उधमपुर, अनंतनाग, कठुआ, पुंछ, शोपियां, गांदरबल, बडगाम, कुपवाड़ा और डोडा सहित कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का येलो अलर्ट जारी किया गया है. 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है. ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक जलस्तर बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है. श्रीनगर में अधिकतम तापमान 30 और न्यूनतम 19 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. अमरनाथ यात्रा मार्ग पर भी प्रशासन लगातार मौसम की निगरानी कर रहा है.
हिमाचल प्रदेश में मानसून लगातार कहर बरपा रहा है. (AP)

पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ का खतरा, नदियां उफान पर

पूर्वोत्तर भारत में मानसून का सबसे अधिक असर देखने को मिल सकता है. आईएमडी के अनुसार असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 9 जुलाई को बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. इसके अलावा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी कई स्थानों पर भारी वर्षा का अनुमान है. लगातार बारिश से ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने का खतरा रहेगा. प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है.

दक्षिण भारत में समुद्री हवाओं से तेज बारिश का दौर जारी

दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है. केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप में अगले कुछ दिनों तक मध्यम से भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार समुद्र के ऊपर सक्रिय मौसमी सिस्टम और दक्षिणी गुजरात से मध्य केरल तक फैली ट्रफ लाइन के कारण पश्चिमी घाट के इलाकों में लगातार बादल छाए रहेंगे. कई स्थानों पर गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है. तमिलनाडु के पश्चिमी घाट से जुड़े जिलों में अगले 48 घंटे तक मौसम अस्थिर रहने का अनुमान है. वहीं, तटीय इलाकों में अधिक नमी के कारण लोगों को उमस का भी सामना करना पड़ सकता है. मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है.

मुंबई-महाराष्ट्र में 15 जुलाई तक राहत के आसार नहीं

महाराष्ट्र में मानसून का असर सबसे ज्यादा मुंबई, पुणे, पालघर, रायगढ़ और कोंकण क्षेत्र में देखने को मिल रहा है. IMD के मुताबिक मुंबई और उपनगरों में 15 जुलाई तक रुक-रुककर हल्की से मध्यम, जबकि कई इलाकों में भारी बारिश जारी रह सकती है. लगातार बारिश से जलभराव, ट्रैफिक जाम और लोकल परिवहन प्रभावित होने की आशंका है. पालघर और आसपास के जिलों में नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है, जबकि पुणे में भी कई निचले इलाकों में पानी भरने की घटनाएं सामने आई हैं. प्रशासन ने लोगों से समुद्र तटों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है. मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि अगले सात दिन महाराष्ट्र के लिए संवेदनशील रह सकते हैं और किसी भी समय भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है.

क्या अगले 7 दिनों तक पूरे देश में एक जैसी बारिश होगी?

नहीं. बारिश की तीव्रता हर राज्य में अलग-अलग रहेगी. पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश के साथ भूस्खलन का खतरा अधिक है. उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में तेज बारिश और आंधी देखने को मिल सकती है. पश्चिमी तट, खासकर महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक में लगातार बारिश का दौर रहेगा, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ का जोखिम सबसे ज्यादा रहेगा.

लो-प्रेशर एरिया बारिश को कैसे प्रभावित करता है?

कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) वातावरण में नमी को अपनी ओर खींचता है. इससे बादल तेजी से बनते हैं और बड़े इलाके में लगातार बारिश होती है. यदि यह सिस्टम धीरे-धीरे आगे बढ़े तो कई दिनों तक एक ही क्षेत्र में भारी वर्षा हो सकती है. फिलहाल मध्य भारत के ऊपर बना ऐसा ही सिस्टम उत्तर भारत की ओर बढ़ रहा है, जिससे कई राज्यों में मौसम बिगड़ने की संभावना है.

क्या किसानों के लिए यह बारिश फायदेमंद है?

सामान्य और संतुलित मानसूनी बारिश खरीफ फसलों के लिए बेहद लाभदायक होती है. धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दालों की बुवाई में इससे मदद मिलती है. हालांकि, अत्यधिक बारिश या जलभराव होने पर फसलों को नुकसान भी पहुंच सकता है. इसलिए किसानों को स्थानीय कृषि विभाग और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार खेती का काम करना चाहिए.

पहाड़ी इलाकों की यात्रा करने वालों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जाने वाले यात्रियों को यात्रा से पहले मौसम का ताजा अपडेट जरूर देखना चाहिए. भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचें. रात के समय पहाड़ी मार्गों पर सफर करने से परहेज करें और प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करें. चारधाम और अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए.

बारिश और आंधी के दौरान आम लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

तेज आंधी और बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े न हों. जलभराव वाली सड़कों पर वाहन धीरे चलाएं. मोबाइल पर मौसम विभाग के अलर्ट पर नजर रखें. यदि आपके क्षेत्र में रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है तो बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें और आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देशों का पालन करें.



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