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G9 Banana Farming: अगर आप भी पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करने और कम समय में मोटा मुनाफा कमाने की सोच रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए है. रामपुर के थाना अजीमनगर के रहने वाले किसान मोहम्मद आसिफ ने यूट्यूब के जरिए ‘G9 केले’ की आधुनिक खेती के बारे में सीखा और इसे अपनी कमाई का जरिया बना लिया. आज वे अपने तीन एकड़ के खेत में केले की बंपर पैदावार लेकर लाखों का मुनाफा कमाने की तैयारी कर रहे हैं.
रामपुर: अगर आप खेती-किसानी में कुछ नया करने की सोच रहे हैं, तो रामपुर के थाना अजीमनगर के रहने वाले किसान मोहम्मद आसिफ की कहानी आपको जरूर प्रेरित करेगी. आसिफ ने यूट्यूब पर G9 केले की खेती के बारे में सीखा और फिर हिम्मत जुटाकर तीन एकड़ में इसकी शुरुआत कर दी. मोहम्मद आसिफ ने बताया कि उन्होंने तीन एकड़ में G9 (ग्रैंड नैन) केले की खेती की. इस खेती को शुरू करने का आइडिया उन्हें यूट्यूब से मिला था. पहले उन्होंने इस खास वैरायटी के बारे में पूरी जानकारी जुटाई और फिर इसके पौधे सीधे महाराष्ट्र से मंगवाए. ट्रांसपोर्ट का खर्च जोड़कर उन्हें एक पौधा करीब 18 रुपये का पड़ा. उन्होंने बताया कि पिछले साल 10 जुलाई को यह पौधे लगाए गए थे, जो अब आने वाले अगस्त से सितंबर के बीच पहली कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएंगे.
एक एकड़ में 5 लाख तक का मुनाफा
G9 केले की सबसे बड़ी खासियत इसका भारी गुच्छा होता है. इसके एक ही गुच्छे का वजन 40 से 45 किलो तक पहुंच जाता है. उन्होंने एक एकड़ में करीब 1200 पौधे लगाए हैं. अगर औसतन 40 किलो का एक गुच्छा भी मान लें, तो एक एकड़ से करीब 480 क्विंटल तक का बंपर उत्पादन मिल सकता है. बाजार में अच्छी पैदावार और सही भाव मिलने पर किसान को प्रति एकड़ 4 से 5 लाख रुपये तक का मुनाफा आसानी से हो जाएगा.
ऐसे करें खेत की तैयारी और रोपाई
किसान के मुताबिक, केले की खेती शुरू करने से पहले खेत को अच्छी तरह तैयार करना सबसे जरूरी काम है. इसके लिए सबसे पहले गहरी जुताई करके खेत को एक बराबर करना होता है. इसके बाद मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए खेत में भरपूर मात्रा में सड़ी हुई गोबर की खाद डाले. तैयारी के बाद पौधों को 6 फीट × 6 फीट की दूरी पर लगाएं. इस दूरी का फायदा यह होता है कि हर पौधे को पर्याप्त धूप, हवा और बढ़ने के लिए पूरी जगह मिलती है, जिससे पौधों में बीमारी का खतरा भी काफी कम रहता है.
रोपाई का सही समय और रैटून फसल का लाभ
किसान के अनुसार, G9 केले की रोपाई का सबसे अच्छा समय फरवरी से अप्रैल और मानसून शुरू होने के बाद जुलाई-अगस्त तक माना जाता है. हालांकि, जिन इलाकों में सिंचाई की अच्छी व्यवस्था हो, वहां किसान अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग समय पर भी इसकी रोपाई कर सकते हैं. आमतौर पर पौधा लगाने के 11 से 13 महीने बाद फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है. खास बात यह है कि एक बार मुख्य फसल लेने के बाद, उसी पौधे से नीचे से निकलने वाले सकर (नई पौध) से रैटून फसल भी ली जाती है. अगर अच्छी देखभाल की जाए, तो किसान एक बार पौधा लगाकर 2 से 3 बार फसल ले सकते हैं.
सिंचाई का रखें खास ध्यान, ड्रिप सिस्टम है बेस्ट
इस खेती में सिंचाई का बहुत अहम रोल है. शुरुआती दिनों में मिट्टी में नमी बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. गर्मी के मौसम में हर 4 से 5 दिन के अंतर पर और सर्दियों में 7 से 10 दिन के अंतर पर खेत में पानी देना चाहिए. इसके लिए ड्रिप सिंचाई (टपक पद्धति) सबसे बेहतर मानी जाती है, क्योंकि इससे पानी की भारी बचत होती है और खाद भी सीधे पौधों की जड़ों तक आसानी से पहुंच जाती है. ध्यान रहे कि खेत में पानी का ठहराव बिल्कुल नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे जड़ें सड़ने का खतरा रहता है.
भारी गुच्छों को गिरने से बचाएगा रस्सी का सहारा
किसान ने बताया कि केले की खेती में जब पौधों पर गुच्छा बन जाता है, तो उसके बाद रस्सी का प्रबंधन करना बेहद जरूरी होता है. जब पौधों पर भारी-भारी गुच्छे आते हैं, तो उनका वजन इतना बढ़ जाता है कि तेज हवा या बारिश में पौधों के टूटने या गिरने का डर रहता है. इससे पूरी फसल खराब हो सकती है. इस नुकसान से बचने के लिए उन्होंने अपने खेत में पौधों को मजबूत रस्सियों के सहारे एक-दूसरे से बांध दिया है. इससे पौधे सीधे खड़े रहते हैं और केले के गुच्छों का विकास भी बहुत बढ़िया तरीके से होता है.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें