उत्तर प्रदेश स्थित अयोध्या के राम मंदिर में जिन जिम्मेदारों पर भक्तों की आस्था और भक्ति स्वरूप चढ़ावे को संभालने का जिम्मा था, उन्हीं ने पीठ में छुरा भोंक दिया है. 8 आरोपियों में सात के संदर्भ में सामने आई जानकारी ने इस बात की पुष्टि लगभग कर दी है कि न सिर्फ इस मामले को छिपाने की कोशिश की गई बल्कि जब धनराशि बरामद हुई तो उसे ट्रस्टी ने लॉकर में लाकर रख दिया.
एबीपी न्यूज़ के पास उपलब्ध डॉक्यूमेंट्स के अनुसार पुलिस ने आरोपी अनुकल्प मिश्रा से पूछताछ की और उसका बयान दर्ज किया. पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान अनुकल्प मिश्रा ने मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे की धनराशि की गणना के समय चोरी, गबन और भ्रष्टाचार किए जाने की बात स्वीकार करते हुए ट्रस्ट की बची हुई धनराशि वापस करने की बात कही. आरोपी ने बताया कि संबंधित नकदी ट्रस्टी/वादी द्वारा अपने कब्जे में लेकर लॉकर में रखी गई थी.
अनुकल्प मिश्रा से कुल 16 लाख 82 हजार 40 रुपये की बरामदगी हुई. जिसमें
– 500 रुपये के 2,853 नोट – 14,26,500 रुपये
– 200 रुपये के 423 नोट – 84,600 रुपये
– 100 रुपये के 707 नोट – 70,700 रुपये
– 50 रुपये के 2,004 नोट – 1,00,200 रुपये
– 20 रुपये के 2 नोट – 40 रुपये थे.
अनुकल्प की दादी का दावा- आरोप झूठे
इन सबके बीच बुधवार को पुलिस ने अनुकल्प मिश्रा के घर छापा मारा. इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए अनुकल्प की दादी सीता देवी ने कहा ‘अनुकल्प मेरा प्यारा पोता है. वह कभी शिकायत नहीं करता. वह इधर-उधर नहीं घूमता और वह गुटखा या पान नहीं खाता.’
वहीं उत्तर प्रदेश के मंत्री जेपीएस राठौर ने अयोध्या राम मंदिर चंदे में कथित हेराफेरी के मामले पर कहा, इसकी पूरी जांच होनी चाहिए और हर चीज का हिसाब होगा.जो लोग अयोध्या में राम मंदिर बनने नहीं देना चाहते थे, जो लोग राम के अस्तित्व को नकारने का काम करते थे, वही आज सबसे ज्यादा बाते कर रहे हैं. जो भी इसमें दोषी होगा, सबको दंडित किया जाएगा.