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चमरौहा गांव निवासी आनंद कुमार द्विवेदी ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि बरसात का मौसम उनके लिए सबसे अधिक कष्टदायक होता है. उन्होंने कहा कि पहले यह इलाका डकैतों के आतंक से परेशान था और अब हर वर्ष बरदहा नदी लोगों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन जाती है, यदि गांव में कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाए तो उसे समय पर अस्पताल तक पहुंचाना लगभग असंभव हो जाता है. कई बार मरीज गांव में ही दम तोड़ देते हैं या फिर घरेलू उपचार के भरोसे रहना पड़ता है. उनका कहना है कि वर्षों से हम लोग पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं. हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां पुल निर्माण की घोषणा की है, जिससे लोगों में उम्मीद जगी है..
चित्रकूटः बारिश का मौसम शुरू होते ही चित्रकूट जिले के पाठा क्षेत्र के कई गांवों की परेशानी एक बार फिर सामने आने लगी है. पहली ही तेज बारिश के बाद चमरौहा और सकरौहा गांव के हजारों ग्रामीणों का तहसील मुख्यालय से संपर्क टूटने लगा है. बरदहा नदी में पानी बढ़ते ही लोगों के लिए गांव से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. हालात ऐसे बन जाते हैं कि ग्रामीण स्वास्थ्य, शिक्षा, बाजार और सरकारी कामकाज के लिए भी गांव से बाहर नहीं जा पाते है.
वही मौके के हालात जानने के लिए चित्रकूट लोकल 18 की टीम जब पाठा क्षेत्र के चमरौहा गांव स्थित बरदहा नदी पहुंची, तो वहां मौजूद ग्रामीणों की आंखों में वर्षों पुराना दर्द साफ दिखाई दे रहा था. लोगों का कहना था कि हर चुनाव में पुल निर्माण का वादा किया जाता है, लेकिन आज तक यह सपना पूरा नहीं हो सका है. बरसात के तीन महीने उनके लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होते है.
जान जोखिम में डाल करते हैं पार
नदी उफान पर आते ही या तो जान जोखिम में डालकर उसे पार करना पड़ता है या फिर घंटों और कई बार पूरी रात नदी किनारे ही इंतजार करना पड़ता है. जानकारी के लिए बता दे कि यह बरदहा नदी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है.यही मार्ग दोनों राज्यों के कई गांवों को जोड़ता है और प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन इसी रास्ते से होता है. लेकिन बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है, जिससे हजारों लोग प्रभावित होते हैं.
वही अपनी समस्या बताते हुए चमरौहा गांव निवासी आनंद कुमार द्विवेदी ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि बरसात का मौसम उनके लिए सबसे अधिक कष्टदायक होता है. उन्होंने कहा कि पहले यह इलाका डकैतों के आतंक से परेशान था और अब हर वर्ष बरदहा नदी लोगों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन जाती है, यदि गांव में कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाए तो उसे समय पर अस्पताल तक पहुंचाना लगभग असंभव हो जाता है. कई बार मरीज गांव में ही दम तोड़ देते हैं या फिर घरेलू उपचार के भरोसे रहना पड़ता है. उनका कहना है कि वर्षों से हम लोग पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं. हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां पुल निर्माण की घोषणा की है, जिससे लोगों में उम्मीद जगी है.
पांच हजार की आबादी रहती है प्रभावित
वहीं गांव के निवासी मिथलेश ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि यह सड़क सकरौहा, चमरौहा सहित उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई गांवों को जोड़ती है. पूरे क्षेत्र में लगभग पांच हजार की आबादी रहती है, लेकिन हर वर्ष बरसात के दौरान सभी लोग एक तरह से गांव में कैद हो जाते हैं,मजबूरी में लोग उफनती नदी को पार कर अपनी जान जोखिम में डालते हैं या फिर पानी कम होने का घंटों इंतजार करते हैं.ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं बल्कि करीब 50 वर्षों से चली आ रही है. हर साल बरसात के साथ उनकी मुश्किलें लौट आती हैं, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हो सका.हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि अब उनकी नजर इस बात पर है कि घोषणा कब धरातल पर उतरती है. और कब हम लोगों को इस समस्या से निजात मिल पाएगी.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें