उत्तर प्रदेश के अयोध्या राम मंदिर में दान राशि को लेकर उठे विवाद के बाद धर्मनगरी हरिद्वार के प्रसिद्ध माँ मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट ने बड़ा फैसला लिया है. अब मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की निगरानी के लिए एक समिति का गठन किया गया है.
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं माँ मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने बताया कि समिति में मंदिर प्रशासन के सात पुजारियों को भी शामिल किया गया है, ताकि दान व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे.
पुजारी को चढ़ावा जेब में नहीं रखने की अनुमति नहीं
डॉ रविन्द्र पूरी ने स्पष्ट किया कि मंदिर में चढ़ाए गए नारियल,प्रसाद, फूल को दोबारा नहीं चढ़ाया जाएगा. साथ ही किसी भी पुजारी को चढ़ावा अपनी जेब में रखने की अनुमति नहीं होगी. यदि कोई ऐसा करता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
चंपत राय को फंसाने का आरोप
महंत रविंद्र पुरी ने अयोध्या राम मंदिर के प्रकरण पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चंपत राय को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि चंपत राय का चरित्र निष्कलंक है और उन पर लगाए जा रहे आरोपों पर विश्वास नहीं किया जा सकता. ज़ब तक उन पर आरोप सिद्ध नहीं हो जाता तब तक उन्हें दोषी मानना सही नहीं हैं. जल्द ही षड्यंत्र का खुलासा होगा. उन्होंने बताया कि मंदिर में सभी कर्मचारियों पर और श्रद्धालुओं पर कैमरे से नजर रखी जा रही है.
यहां बता दें कि अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावे में चोरी के बाद उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर से भी चोरी की खबरें आयीं थीं, जिसके बाद मंदिरों के रख-रखाव और दान के प्रबंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं. जिसके तहत कुछ मंदिरों ने ठोस प्रबंधन के लिए कदम उठाए हैं. इसका आने वाले समय में क्या असर होगा ? ये देखने वाली बात होगी, लेकिन आस्था से विश्वास कुछ लोगों का डगमगाया है.
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