इलाहाबाद हाईकोर्ट ने औरैया पुलिस की ओर से जारी चरित्र प्रमाणपत्र पर नाराजगी जताई। कहा कि यह चरित्र प्रमाणपत्र है या निंदा प्रमाणपत्र…। किसी के विरुद्ध दर्ज सिर्फ आपराधिक मामलों का विवरण ही देना चरित्र प्रमाणपत्र नहीं है। इसमें व्यक्ति के सामाजिक आचरण, प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता का मूल्यांकन भी होना चाहिए।
यह तल्ख टिप्पणी न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने औरैया थाना क्षेत्र के सुमित सिंह की याचिका पर की। सुमित का भारतीय सेना में चयन हो गया था। उसे 10 दिन का वक्त दिया गया था। थाने से चरित्र प्रमाणपत्र नहीं बनने पर उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने अदालत में चरित्र प्रमाणपत्र पेश किया तो उसमें याची के खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मुकदमे का उल्लेख था।
उसमें याची के सामान्य चरित्र, सामाजिक व्यवहार और प्रतिष्ठा के संबंध में जानकारी नहीं थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि चरित्र प्रमाणपत्र का उद्देश्य व्यक्ति के समग्र व्यक्तित्व का मूल्यांकन करना है, न कि केवल उसके खिलाफ दर्ज मामलों की सूची उपलब्ध कराना।
एसपी को 24 घंटे के अंदर नया प्रमाणपत्र जारी कराने का निर्देश
कोर्ट ने औरैया के एसपी को निर्देश दिया है कि 24 घंटे के अंदर याचिकाकर्ता को नया, व्यापक और वास्तविक चरित्र प्रमाणपत्र जारी कराएं। साथ ही 29 जून तक इस संबंध में व्यक्तिगत हलफनामा भी दाखिल करें। 29 जून को दोपहर दो बजे मामले की सुनवाई होगी।