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Lakhimpur Traffic Jam: लखीमपुर खीरी के संकटा देवी चौराहे पर ₹16 लाख की लागत से लगी ट्रैफिक लाइटें एक साल से बंद हैं. उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सिस्टम ठप होने से जनता भयंकर जाम से परेशान है. नगर पालिका अध्यक्ष इरा श्रीवास्तव ने जल्द मरम्मत का आश्वासन दिया है, लेकिन स्मार्ट सिटी के दावों के बीच शहर की पहली ट्रैफिक व्यवस्था खुद बदहाल है.
लखीमपुर खीरी: शहर को स्मार्ट और जाम-मुक्त बनाने का प्रशासनिक दावा संकटा देवी चौराहे पर आकर दम तोड़ रहा है. करीब 16 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से लगाई गई आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल लाइटें उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद बंद हो गईं, जो पिछले एक साल से महज ‘शोपीस’ बनी हुई हैं. सार्वजनिक धन की बर्बादी और प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह है कि शहर के सबसे व्यस्त चौराहे पर जनता रोजाना घंटों रेंगने को मजबूर है और जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं.
भव्य उद्घाटन के बाद ही सिस्टम हुआ फेल
शहर में बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए ट्रैफिक व्यवस्था को स्मार्ट बनाने की योजना शुरू की गई थी. इसी क्रम में संकटा देवी चौराहे पर आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे. 2 मई 2025 को तत्कालीन जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल, पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद साहा तथा सदर विधायक योगेश वर्मा ने इनका उद्घाटन किया था. उस समय इसे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया था.
लाखों की योजना बनी महज शोपीस
हालांकि, उद्घाटन के कुछ दिनों बाद ही ट्रैफिक सिग्नल बंद हो गए. तब से लेकर आज तक ये केवल शोपीस बनकर रह गए हैं. न तो संबंधित विभाग ने इन्हें नियमित रूप से संचालित किया और न ही समय पर मरम्मत कराई. परिणामस्वरूप चौराहे पर यातायात व्यवस्था फिर से पुलिसकर्मियों के इशारों या वाहन चालकों की समझ पर निर्भर हो गई है. इसका खामियाजा रोजाना शहरवासियों और बाहर से आने वाले लोगों को जाम के रूप में भुगतना पड़ रहा है.
व्यस्त चौराहे पर रेंग रही जिंदगी
संकटा देवी चौराहा शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है. यहां चारों दिशाओं से आने वाले वाहनों की संख्या अधिक रहती है. ट्रैफिक सिग्नल बंद होने के कारण वाहन अव्यवस्थित ढंग से निकलते हैं, जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है. स्कूल जाने वाले बच्चों, नौकरीपेशा लोगों, मरीजों और व्यापारियों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है.
जनता का सवाल और नगर पालिका का आश्वासन
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब लाखों रुपये खर्च कर ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे तो उम्मीद थी कि शहर को जाम से राहत मिलेगी, लेकिन रखरखाव के अभाव में पूरी योजना कागजों तक सीमित होकर रह गई. उनका सवाल है कि सार्वजनिक धन से स्थापित व्यवस्था यदि लंबे समय तक बंद पड़ी रहे तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
इस मामले पर नगर पालिका अध्यक्ष इरा श्रीवास्तव ने कहा कि ट्रैफिक सिग्नल बंद होने का मामला उनके संज्ञान में है. उन्होंने बताया कि जल्द ही आवश्यक मरम्मत कराकर सिग्नल लाइटों को दोबारा सुचारु रूप से चालू कराया जाएगा, ताकि शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर हो और लोगों को जाम की समस्या से राहत मिल सके.
स्मार्ट सिटी के दावों के बीच बदहाली
फिलहाल स्थिति यह है कि करोड़ों की स्मार्ट सिटी जैसी योजनाओं की चर्चा के बीच लखीमपुर की पहली ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था खुद बदहाल नजर आ रही है. अब शहरवासियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और संबंधित विभाग कब तक इस व्यवस्था को दोबारा चालू कराते हैं.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें