आम के एक पेड़ में 236 किस्म के फल आते हैं। यह सुनने में हैरतभरा लगता है, लेकिन सच है। प्रयोग सफल होने के बाद अब इसे बागवानों तक पहुंचाने की तैयारी है। प्रदेश में आम की बागवानी बढ़ाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। पर्यावरण में हो रहे बदलाव की वजह से कई बार एक किस्म में फल आता है तो दूसरी में नहीं आता है। इसी को ध्यान में रखकर केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने प्रयोग शुरू किया। आम के एक पेड़ की टहनियों में हर साल नई किस्मों की ग्राफ्टिंग (कलम विधि) की गई। दशहरी के पेड़ में लंगड़ा, सफेदा, आम्रपाली, चौसा, बैगनपल्ली आदि किस्में को प्रत्यारोपित किया गया। करीब चार साल में एक के बाद 236 किस्मों की कलम बांधी गई। अब उनमें फल आने लगे हैं। इससे उत्साहित वैज्ञानिक अब इस विधि के बारे में बागवानों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।