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सिर्फ हाईवे नहीं, यूपी की तरक्की का इंजन है गंगा एक्सप्रेस-वे, कई धार्मिक स्थल होंगे कनेक्ट, तीर्थयात्रियों के लिए अब ‘सफर’ होगा सुहाना
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Lucknow Fire: 15 स्‍टूडेंट की मौत का असली गुनहगार कौन? सस्पेंशन तो सिर्फ ट्रेलर, इन 5 विभागों पर गाज ग‍िरनी तय


Last Updated:

Who is Responsible Lucknow Fire: लखनऊ के अलीगंज (पुरनिया) अग्निकांड में 15 छात्रों की मौत के बाद शासन स्तर पर बड़ी कार्रवाई तो हुई है, लेकिन इस हादसे ने पूरे सिस्टम की भ्रष्टाचार और लापरवाही की पोल खोल दी है. इस दर्दनाक त्रासदी के लिए कोई एक व्यक्ति नहीं, बल्कि लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), नगर निगम, जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस और फायर विभाग के आला अधिकारी सामूहिक रूप से जिम्मेदार हैं. कागजों पर नोटिस का खेल खेलने, बिना वेंटिलेशन और लाइसेंस के रिहायशी इलाके में पेट क्लीनिक चलने देने और सुरक्षा गाइडलाइंस को ताक पर रखकर ‘गैस चैंबर’ बनने देने की प्रशासनिक साठगांठ ने ही छात्रों को मौत के मुंह में धकेला है.

Zoom

अधिकारियों के सस्पेंशन के बाद इन पांच विभागों पर गाज गिरनी तय है.

Who is Responsible For Lucknow Coaching Fire: लखनऊ के अलीगंज (पुरनिया) में अवैध कमर्शियल बिल्डिंग में लगी भीषण आग ने 15 हंसते-खेलते परिवारों के चिरागों को हमेशा के लिए बुझा दिया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लापरवाही बरतने वाले 4 बड़े अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है और बिल्डिंग मालिक के साथ अन्य आरोपी सलाखों के पीछे है.

निलंबित अधिकारियों में जानकीपुरम के एक्सियन (XEN) गौरव कुमार, इंदिरा नगर के एफएसएसओ (FSSO) कमलेन्द्र कुमार सिंह, एलडीए के असिस्टेंट इंजीनियर (AE) अनिल कुमार और जूनियर इंजीनियर (JE) प्रमोद पांडे शामिल हैं. लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या केवल इन चार मोहरों को हटाने से सिस्टम पाक-साफ हो जाएगा? ग्राउंड जीरो से जो सच सामने आ रहा है, वह यह साफ करता है कि यह हादसा नहीं, बल्कि सरकारी महकमों की मिलीभगत से की गई ‘संस्थागत हत्या’ है. आइए देखते हैं इस महा-त्रासदी के पीछे किस विभाग की क्या भूमिका रही-

प्रशासनिक साठगांठ ने ही छात्रों को मौत के मुंह में धकेला

1. लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA): 10 साल तक क्यों सोता रहा महकमा?
इमारत के अवैध निर्माण और गलत नक्शे को लेकर एलडीए की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि अवैध कॉम्प्लेक्स के निर्माण के समय शपथ पत्र के साथ दिए गए स्वीकृत मानचित्र का सख्ती से पालन क्यों नहीं कराया गया? एलडीए ने साल 2016 में ही इस अवैध बेसमेंट और बहुमंजिला निर्माण को लेकर एक नोटिस जारी किया था; तो फिर पिछले 10 सालों में उस नोटिस को ठंडे बस्ते में क्यों डाले रखा गया? इस ‘डेथ ट्रैप’ को समय रहते सील या ध्वस्त क्यों नहीं किया गया? अवैध निर्माण और बिना अनुमति के रिहायशी जमीन का धड़ल्ले से कमर्शियल उपयोग होने देने वाले लापरवाह अधिकारियों पर एलडीए के आला अफसरों ने पहले एक्शन क्यों नहीं लिया?

2. नगर निगम: 6 साल तक ‘टैक्स’ की मलाई खाई, सुरक्षा को ठुकराया
बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर चल रहा ‘पेट क्लीनिक’ इस त्रासदी का मुख्य केंद्र साबित हुआ, जहां ज्वलनशील सामान भरा था. इस क्लीनिक के पास न तो उचित वेंटिलेशन था और न ही मेडिकल कचरा व सुरक्षा प्रबंधन का कोई वैध लाइसेंस. इतने भीड़भाड़ वाले रिहायशी इलाके में बिना कड़े मानकों के पेट क्लीनिक के संचालन को पूरी तरह अनदेखा करना नगर निगम की बहुत बड़ी प्रशासनिक विफलता है. चौंकाने वाली बात यह है कि नगर निगम ने वर्ष 2022 से इस बिल्डिंग से भारी-भरकम ‘कामर्शियल टैक्स’ वसूलना शुरू कर दिया था, लेकिन उससे पहले के छह सालों तक निगम ने इस अवैध गतिविधि पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या निगम को केवल राजस्व की मलाई चाटने से मतलब था?

3. जिला प्रशासन (DM): सुस्त टास्क फोर्स और कागजी गाइडलाइंस
जिले के प्रशासनिक मुखिया होने के नाते पूरे लखनऊ में कोचिंग संस्थानों, कंप्यूटर सेंटरों और कमर्शियल बिल्डिंगों में सुरक्षा गाइडलाइंस का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करवाना जिलाधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी थी. देश के अन्य हिस्सों में पूर्व में हुए बड़े अग्निकांडों से कोई सबक नहीं लिया गया. कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा जांच के लिए बनाई गई विशेष टास्क फोर्स को पूरी तरह सुस्त छोड़ दिया गया, जिसके कारण रिहायशी इलाकों में मौत की ऐसी फैक्ट्रियां बिना किसी डर के चलती रहीं.

4. स्थानीय पुलिस (DCP): फेल रही बीट प्रणाली
स्थानीय कानून व्यवस्था और सुरक्षा को भांपने वाली स्थानीय पुलिस की बीट प्रणाली इस मामले में पूरी तरह फेल साबित हुई. क्षमता से अधिक छात्र-छात्राओं को तंग और संकरे कमरों में ठूस-ठूस कर बिठाने, और आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एक्जिट) के रास्ते बंद होने की लगातार शिकायतों पर समय रहते स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा कोई कानूनी कार्रवाई या तालाबंदी क्यों नहीं की गई? स्थानीय स्तर पर पुलिस का सूचना तंत्र पूरी तरह पंगु बना रहा.

5. फायर विभाग (अग्निशमन): मौत की तैयारी पर मूंदे रहे आंखें
किसी भी सार्वजनिक या कमर्शियल भवन में अग्निशमन उपकरणों की मौजूदगी, प्रवेश और निकास (एंट्री-एग्जिट) की सही व्यवस्था की सघन जांच कर एनओसी (NOC) जारी करना फायर विभाग का काम है. एक संकरी सीढ़ी वाली तीन मंजिला इमारत में 30 से ज्यादा बच्चों के बैठने और ग्राउंड फ्लोर पर ज्वलनशील चारा व फर्नीचर भरे होने की इस ‘भयावह तैयारी’ को लेकर फायर विभाग के अधिकारी सालों तक आंखें क्यों मूंदे रहे?

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Deep Raj DeepakSub-Editor

Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें



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