अखिलेश यादव राम मंदिर में चंदा चोरी का मुद्दा जोर शोर से उठा रहे हैं. कह रहे कि भाजपा का लंकाकांड, अयोध्या में ही होगा. भगवान के ऑडिट से भाजपाई-गिरोह बच नहीं पाएगा. चंदा चोरी के इस खेल से बीजेपी असहज तो है, लेकिन ये भी कह रही कि कोई बचेगा नहीं. वह जानती है कि यह पिच हमेशा से उसकी रही है. धर्म-मंदिर, हिन्दू… इस पिच पर अब तक बीजेपी सबको मात देती रही है. तो फिर अखिलेश कहां बच पाते. सीएम योगी ने ऐसी गुगली फेंक दी है कि अखिलेश यादव के लिए उसे झेल पाना आसान नहीं होगा. क्योंकि बीजेपी पूरे मूड में है कि वह मथुरा-काशी का मुद्दा उठाएगी. अखिलेश को मजबूर करेगी यह कहने के लिए कि मथुरा में कान्हा की जन्मस्थली खाली होनी चाहिए. काशी में मस्जिद की जमीन छिननी चाहिए. क्या अखिलेश इस गुगली पर छक्का लगा पाएंगे?
कहानी की शुरुआत होती है अयोध्या से, जहां राम मंदिर ट्रस्ट के चढ़ावे में सेंधमारी की बात सामने आई. बात हवा-हवाई नहीं थी, बल्कि बाकायदा सीसीटीवी फुटेज सामने आए. गिरफ्तारियां हुईं. अखिलेश यादव को एक ऐसा मुद्दा मिल गया, जिससे वो सीधे रामभक्तों की भावनाओं को छूते हुए बीजेपी को कटघरे में खड़ा कर सकें. अखिलेश की कोशिश ये थी कि राम मंदिर निर्माण का जो क्रेडिट बीजेपी ने पिछले कई सालों में लिया है, उस पर एक झटके में पानी फेरा जाए. लेकिन बीजेपी अपनी पिच पर किसी और को सेंचुरी कैसे मारने देती. ऐसे में सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ जवाब देने के लिए खुद क्रीज पर उतर गए.
रामलला के दर्शन करने की चुनौती
मुख्यमंत्री योगी ने अखिलेश के अयोध्या को धार्मिक नगरी बनाने वाले बयान पर तंज कसते हुए सीधे नब्बे के दशक की याद दिला दी. योगी ने कहा कि अयोध्या को रामभक्तों ने खुद सजाया-संवारा है, आप क्या उसे धार्मिक नगरी बनाएंगे? योगी ने अखिलेश को याद दिलाया कि उनकी ही सरकार ने रामभक्तों पर गोलियां चलवाई थीं. उन्होंने नसीहत दे डाली कि अखिलेश पहले अपने पुराने पापों का पश्चाताप करें और हिम्मत जुटाकर एक बार जाकर रामलला के दर्शन कर लें.
अखिलेश यादव के लिए एक ओर कुआं, दूसरी ओर खाई
लेकिन योगी इतने पर ही नहीं रुके, उन्होंने इसके बाद वो खतरनाक गुगली फेंकी, जिसे झेल पाना अखिलेश के लिए फिलहाल सबसे मुश्किल काम है. सीएम योगी ने अखिलेश को सीधी चुनौती दे डाली कि अगर उनमें सचमुच खुद को धार्मिक कहलाने की हिम्मत है, तो वो मथुरा और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर भी खुलकर बोलें. योगी ने तंज कसते हुए कहा कि आपमें हिम्मत ही नहीं है क्योंकि आप मुल्ला और मौलवियों के आगे घुटने टेकते हैं.
योगी की यह मथुरा वाली चुनौती दरअसल अखिलेश यादव के लिए आगे कुआं और पीछे खाई जैसी है. अखिलेश खुद को यदुवंशी बताते हैं और पीडीए की राजनीति के तहत मुस्लिम उनका कोर वोट बैंक है. अब अगर वो मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि को खाली कराने का समर्थन करते हैं, तो उनका मुस्लिम वोटर खिसक जाएगा. और अगर वो चुप रहते हैं या विरोध करते हैं, तो बीजेपी तुरंत कहेगी कि ये कैसे यदुवंशी हैं जिन्हें अपने आराध्य कान्हा की चिंता नहीं है. इस सियासी दुविधा में सपा बुरी तरह फंस गई है.
2027 की फुलप्रूफ प्लानिंग..
इस सियासी महाभारत के पीछे बीजेपी की 2027 के विधानसभा चुनावों की फुलप्रूफ प्लानिंग नजर आती है. पार्टी का फोकस अब अवध से शिफ्ट होकर ब्रज यानी मथुरा की तरफ जा रहा है. ये यूं ही नहीं है कि सीएम योगी अब तक 38 बार मथुरा-वृंदावन का दौरा कर चुके हैं. मौजूदा योगी कैबिनेट में 12 मंत्री सिर्फ ब्रज क्षेत्र से आते हैं और आने वाली 12 जुलाई को बीजेपी की राज्य कार्यकारिणी की अहम बैठक भी मथुरा में ही होने जा रही है. साफ है कि बीजेपी ने अपनी अगली चुनावी बिसात बिछा दी है.
तो कहानी सिर्फ इतनी है कि अखिलेश यादव ने अयोध्या में चंदा चोरी का मुद्दा उठाकर जो सियासी चाल चली थी, सीएम योगी ने मथुरा-काशी का ब्रह्मास्त्र छोड़कर उसकी हवा निकालने की पूरी कोशिश की है. बीजेपी ने अखिलेश को मजबूर कर दिया है कि वो अपनी ही बुनी हुई वोट बैंक की जाल में उलझ जाएं. धर्म और हिंदुत्व की इस पिच पर अखिलेश ने बाउंसर फेंकने की जुर्रत तो की, लेकिन योगी की इस मथुरा वाली गुगली पर वो खुद क्लीन बोल्ड होते हुए नजर आ रहे हैं.