राम मंदिर चढ़ावा चोरी की घटना से ट्रस्ट के भीतर पनपी आपसी फूट भी अब सामने आ रही है। ट्रस्ट के ही कुछ पदाधिकारियों ने अपने बयानों में चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव पर सवाल खड़े किए हैं। एक-दो ट्रस्टियों ने सीधे हेरफेर करने से लेकर कमीशन तक के आरोप लगाए हैं। चूंकि आवाज भीतर से ही उठी है, लिहाजा शक गहराता जा रहा है। सबसे अधिक सवाल अनिल मिश्रा व गोपाल राव पर लगाए गए हैं।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला उजागर होने के बाद ट्रस्ट के पूर्व अधिकारी महिलापाल सिंह समेत तमाम लोगों ने ट्रस्ट के वर्तमान पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। किसी ने फुटेज डिलीट करने तो किसी ने कमीशनखोरी का आरोप लगाया। जिसको लेकर एसआईटी के सामने कई लोग पेश होकर अपने बयान भी दर्ज करवा चुके हैं।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने ट्रस्ट के कई पदाधिकारियों के भी बयान जांच में शामिल किए हैं, जिससे ट्रस्ट की आंतरिक व्यवस्थाओं के बारे में और गहनता से पता चल सके। सूत्र बताते हैं कि कई पदाधिकारियों ने चंपत राय की भूमिका शह देने में बताई है। जिसमें उन्होंने कहा कि सबकुछ पता था, लेकिन चंपत राय ने मामला दबाया। वह अपने स्तर से रफादफा करने की कोशिश कर रहे थे, जिससे बाहर बात न जाए। इसके पीछे का तर्क यह था कि अगर बात बाहर गई तो बदनामी होगी।
अनिल-गोपाल पर सबसे अधिक आरोप
सूत्रों के मुताबिक, बयानों में पदाधिकारियों ने सबसे अधिक आरोप अनिल मिश्रा और गोपाल राव पर लगाए हैं। उन्होंने भी इस बात की पुष्टि की है कि कर्मचारियों की नियुक्ति में सबसे अधिक दखल अनिल मिश्रा का रहता था। वहीं, ट्रस्ट में कोई पद न होने के बावजूद गोपाल राव आमंत्रित सदस्य के तौर पर शामिल होते थे और प्रबंधन के हर एक निर्णय में उनकी भूमिका रहती थी।
लंबे समय से ट्रस्ट में सबकुछ ठीक नहीं
चोरी का मामला उजागर होने के बाद मंदिर प्रबंधन से जुड़े रहे व अन्य तमाम लोगों ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर सवाल खड़े किए थे। वहीं, अब दो-तीन पदाधिकारियों ने ही अपने बयानों में मुख्य पदाधिकारियों पर संदेह तक जताया है। इससे स्पष्ट है कि लंबे समय से ट्रस्ट में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा था। तमाम गड़बड़ियां व अव्यवस्थाएं रही हैं, जो अब धीरे-धीरे उजागर हो रही हैं।
सीए भी जांच की जद में, पूछताछ की चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट का पूरा लेखा-जोखा तीन सीए देखते हैं, जिनमें बिहार के चंदन राय, राजस्थान के नरपत थोपिया व लखनऊ के अक्षय शामिल हैं। चूंकि ऑडिट संबंधी जांच एसआईटी कर रही है, लिहाजा जांच की जद में ये सीए भी हैं। सूत्र बताते हैं कि एसआईटी ने इनसे संपर्क कर पूछताछ की है। इसकी चर्चा है, लेकिन आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
बैंक का एक मैनेजर भी रडार पर
सूत्रों के मुताबिक, अनिल मिश्रा के घर पर एक बैंक मैनेजर किराये पर रहते थे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कहीं किसी तरह की कोई मिलीभगत तो नहीं रही। क्योंकि गणना में सबसे अधिक जिम्मेदारी बैंक की रहती थी। यह लापरवाही थी या किसी साजिश के तहत ऐसा हुआ, इसकी जांच जारी है।
टिन्नू के हॉस्टल में टंकी में काली पन्नी में रखी थी नकदी
चढ़ावा चोरी में रोजाना नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब पता चला है कि रामशंकर यादव टिन्नू के न्यू टीचर्स कॉलोनी स्थित हॉस्टल से भी पुलिस नेें नकदी बरामद होने का जिक्र किया है। टिन्नू के हॉस्टल के प्रथम तल पर स्टील की टंकी में रखी काली पन्नी से नकदी बरामद की गई। इस कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई और एक उपनिरीक्षक को गवाह बनाया गया।